What is Welding in Hindi

आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसी तकनीक की, जो आधुनिक निर्माण कार्य से लेकर भारी मशीनरी तक हर जगह इस्तेमाल होती है — जी हां, हम बात कर रहे हैं Welding की। वेल्डिंग केवल दो धातुओं को जोड़ने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह कला, विज्ञान और तकनीक का अद्भुत संगम है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि वेल्डिंग कितने प्रकार की होती है और इसका वर्गीकरण किन-किन आधारों पर किया जाता है।

Welding क्या है?

Welding एक joining process है जिसमें दो या दो से अधिक धातु (metals) या थर्मोप्लास्टिक भागों को heat, pressure या दोनों की मदद से आपस में स्थायी रूप से जोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया में धातु के किनारों को इतना गर्म किया जाता है कि वे पिघलकर आपस में मिल जाते हैं। कई बार filler material (जैसे electrode wire) का इस्तेमाल भी किया जाता है ताकी joint और मजबूत बने। जब यह ठंडा हो जाता है तो दोनों pieces एकदम मजबूत तरीके से जुड़ जाते हैं।

Welding के प्रकार (Classification of Welding):

प्रक्रिया के आधार पर (Based on Welding Process):

Fusion Welding (गलन वेल्डिंग)

Arc Welding (आर्क वेल्डिंग):

  1. Shielded Metal Arc Welding (SMAW) / Manual Metal Arc (MMAW)
  2. Gas Metal Arc Welding (GMAW) / MIG Welding
  3. Gas Tungsten Arc Welding (GTAW) / TIG Welding
  4. Submerged Arc Welding (SAW)
  5. Plasma Arc Welding (PAW)

Gas Welding:

1. Oxy-Acetylene Welding (OAW)

  • Thermit Welding
  • Electron Beam Welding (EBW)
  • Laser Beam Welding (LBW)

Solid-State Welding (ठोस अवस्था वेल्डिंग)

  • Friction Welding (FW)
  • Friction Stir Welding (FSW)
  • Cold Welding
  • Diffusion Welding
  • Ultrasonic Welding
  • Explosion Welding
  • Forge Welding

Classification को समझने के बाद अब समय है हर वेल्डिंग प्रक्रिया को तकनीकी दृष्टिकोण से विस्तार से जानने का। नीचे हम एक-एक प्रकार की वेल्डिंग के सिद्धांत, प्रक्रिया, उपयोग और सामग्री की पूरी जानकारी देंगे।”वेल्डिंग के हर प्रकार को अलग-अलग समझेंगे ताकि यह साफ़ हो सके कि किस वेल्डिंग तकनीक का उपयोग कब और क्यों किया जाता है।”

Arc Welding क्या है?

Arc Welding एक प्रकार की Fusion Welding प्रक्रिया है जिसमें दो धातुओं को जोड़ने के लिए Electric Arc (विद्युत चाप) का उपयोग किया जाता है। इसमें एक इलेक्ट्रोड और वेल्डिंग धातु के बीच एक उच्च तापमान का आर्क उत्पन्न किया जाता है, जो धातु को पिघला देता है और उन्हें आपस में जोड़ देता है। इस प्रक्रिया में आमतौर पर एक filler material (भराव धातु) का उपयोग किया जाता है जो वेल्ड को मजबूत बनाता है। Arc welding को आमतौर पर धातु की स्थायी जॉइंटिंग के लिए उपयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया औद्योगिक निर्माण, मरम्मत कार्य, शिपबिल्डिंग और ऑटोमोबाइल उद्योग में काफी लोकप्रिय है।

Arc Welding कैसे काम करता है? (Working Principle)

Arc welding में एक विद्युत स्रोत (DC या AC) इलेक्ट्रोड और वर्कपीस के बीच विद्युत चाप उत्पन्न करता है। जैसे ही इलेक्ट्रोड वर्कपीस के पास लाया जाता है और स्पर्श के बाद थोड़ा दूर किया जाता है, वायु का आयनीकरण होता है और एक arc बनता है। यह arc लगभग 6000°C से 7000°C तापमान उत्पन्न करता है, जो धातु को पिघलाने के लिए पर्याप्त होता है। इलेक्ट्रोड से निकलने वाला filler metal और वर्कपीस दोनों पिघलते हैं और मिलकर एक मजबूत वेल्ड बनाते हैं। आर्क के दौरान उत्पन्न प्रकाश और गर्मी से बचने के लिए शील्डिंग गैस या फ्लक्स कोटेड इलेक्ट्रोड का प्रयोग किया जाता है।

Arc Welding के प्रकार (Types of Arc Welding)

  1. Shielded Metal Arc Welding (SMAW) / Manual Metal Arc Welding

Shielded Metal Arc Welding (SMAW) एक मैनुअल वेल्डिंग प्रक्रिया है जिसमें एक flux-coated consumable electrode का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रोड और वर्कपीस के बीच विद्युत चाप (arc) उत्पन्न होता है, जो धातु और इलेक्ट्रोड को पिघला देता है और एक मजबूत वेल्ड बनाता है। फ्लक्स की कोटिंग पिघलकर गैस और स्लैग बनाती है, जो पिघली हुई धातु को ऑक्सीजन और नाइट्रोजन से बचाती है। SMAW प्रक्रिया में जैसे ही इलेक्ट्रोड को वर्कपीस से छुआ जाता है और फिर थोड़ी दूरी बनाई जाती है, एक इलेक्ट्रिक arc बनता है। यह arc इतना गर्म होता है (लगभग 6000°C) कि यह दोनों धातुओं और इलेक्ट्रोड की टिप को पिघला देता है। इलेक्ट्रोड की कोटिंग (flux) इस दौरान जलती है और एक शील्डिंग गैस बनाती है, जो वेल्डिंग क्षेत्र को वायुमंडलीय गैसों से बचाती है। इसके अलावा यह slag भी बनाती है, जो पिघले हुए धातु को ठंडा होने पर ढक लेती है और उसे मजबूत और साफ बनाती है। इसका उपयोग भारी संरचनाओं में (ब्रिज, बिल्डिंग स्ट्रक्चर) पाइपलाइन वेल्डिंग मरम्मत और रखरखाव कार्यों में शिपबिल्डिंग (जहाज़ निर्माण) रेलवे और निर्माण उद्योग ऑयल एंड गैस सेक्टर में किया जाता है। SMAW एक सस्ती, पोर्टेबल और बेहद लचीली वेल्डिंग प्रक्रिया है, जिसे कम प्रशिक्षण के साथ भी सीखा जा सकता है और यह बिना शील्डिंग गैस के किसी भी पोजिशन में, यहां तक कि बाहरी वातावरण में भी आसानी से उपयोग की जा सकती है।”

2. Gas Metal Arc Welding (GMAW) / MIG Welding

Gas Metal Arc Welding (GMAW) एक स्वचालित या अर्ध-स्वचालित वेल्डिंग प्रक्रिया है जिसमें एक consumable wire electrode और शील्डिंग गैस का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया को आमतौर पर MIG Welding (Metal Inert Gas Welding) कहा जाता है क्योंकि इसमें inert gases (जैसे Argon या CO₂) का उपयोग होता है। MIG Welding में वेल्डिंग टॉर्च से एक मोटर की सहायता से continuously wire electrode feed किया जाता है। जैसे ही वर्कपीस और इलेक्ट्रोड के बीच arc बनता है, यह arc electrode को पिघलाकर filler metal बनाता है जो वेल्ड जॉइंट को भरता है। वेल्डिंग टॉर्च से निकलती शील्डिंग गैस (जैसे Argon या CO₂) पिघले हुए धातु को हवा में मौजूद ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और हाइड्रोजन से बचाती है, जिससे वेल्डिंग की गुणवत्ता बनी रहती है।

MIG Welding (GMAW) एक अत्याधुनिक वेल्डिंग तकनीक है जिसे मुख्यतः ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, घरेलू निर्माण, स्टील और एल्युमिनियम फैब्रिकेशन, शिपबिल्डिंग, और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। यह तकनीक लगातार wire feed की वजह से High Productivity प्रदान करती है, जिससे काम तेज और कुशलतापूर्वक होता है। MIG Welding की सबसे बड़ी खासियत इसका साफ वेल्ड देना है क्योंकि इसमें स्लैग नहीं बनता और सफाई की आवश्यकता भी कम होती है। साथ ही, इसमें कम स्पार्क और धुआं निकलता है, जिससे यह अन्य arc welding तकनीकों की तुलना में सुरक्षित और साफ-सुथरी मानी जाती है। इसकी Automation Friendly प्रकृति के कारण इसे रोबोटिक और CNC वेल्डिंग सिस्टम में आसानी से एकीकृत किया जा सकता है। यह प्रक्रिया Flat, Horizontal, Vertical और Overhead सहित सभी पोजीशन में कारगर होती है। MIG Welding में उपयोग होने वाला तापमान लगभग 3500°C से 4000°C के बीच होता है, जबकि करंट की रेंज 50 से 500 Amps और वोल्टेज 15 से 30 Volts के बीच नियंत्रित की जाती है, जो धातु और वायर साइज के अनुसार समायोजित की जाती है।

3. Gas Tungsten Arc Welding (GTAW) / TIG Welding

GTAW या TIG Welding एक उच्च-गुणवत्ता वाली fusion welding प्रक्रिया है जिसमें एक non-consumable tungsten electrode और एक inert shielding gas (जैसे Argon या Helium) का उपयोग किया जाता है। इसमें filler metal की आवश्यकता हो सकती है या नहीं, और arc की गर्मी से base metal पिघलकर जॉइंट बनाता है। यह प्रक्रिया साफ, मजबूत और सटीक वेल्ड प्रदान करती है, इसलिए इसे aerospace, मेडिकल, फूड ग्रेड उपकरणों और परिष्कृत मेटल जॉइनिंग में उपयोग किया जाता है। TIG Welding में एक non-consumable tungsten electrode से वर्कपीस के बीच arc बनाया जाता है। यह arc बहुत ही स्थिर और केंद्रित होता है, जिससे बहुत कम विकृति (distortion) और शुद्ध वेल्ड प्राप्त होता है।
वेल्डिंग टॉर्च से एक inert गैस (जैसे Argon) प्रवाहित होती है जो arc और वेल्ड पूल को वातावरण की ऑक्सीजन और नाइट्रोजन से बचाती है। आवश्यकता होने पर filler rod को अलग से हाथ से वेल्ड पूल में डाला जाता है।

Gas Tungsten Arc Welding (GTAW) या TIG वेल्डिंग एक उच्च गुणवत्ता वाली प्रक्रिया है जो लगभग 6000°C से 11000°C के बीच आर्क तापमान पर काम करती है। इसमें करंट की रेंज DC के लिए 5–300 Amps और AC के लिए 10–250 Amps होती है, जबकि वोल्टेज लगभग 10–25 वोल्ट के बीच नियंत्रित किया जाता है। इस प्रक्रिया में पतली शीट्स के लिए कम करंट और मोटे मेटल्स के लिए अधिक करंट का उपयोग किया जाता है। TIG वेल्डिंग का उपयोग एयरस्पेस इंडस्ट्री, मेडिकल उपकरण निर्माण, फूड एंड बेवरेज इंडस्ट्री (विशेषकर स्टेनलेस स्टील के सैनिटरी जॉइंट्स), आर्टिस्टिक मेटल वर्क, अल्यूमीनियम और मैग्नीशियम की वेल्डिंग, साथ ही साइकिल और ऑटोमोटिव पार्ट्स बनाने में किया जाता है। यह प्रक्रिया बहुत साफ और मजबूत वेल्ड बनाती है, जिसमें कोई फ्लक्स या स्लैग नहीं बनता, इसलिए सफाई की जरूरत नहीं होती। इसके अलावा, यह सभी पोजीशंस में वेल्डिंग संभव बनाती है और फीलर मेटल तथा हीट को अलग-अलग नियंत्रित करने की सुविधा देती है, जिससे वेल्ड पर बेहतर नियंत्रण मिलता है। TIG वेल्डिंग लगभग सभी प्रकार की धातुओं पर इस्तेमाल की जा सकती है, जैसे स्टील, टाइटेनियम, और एल्युमिनियम। हालांकि, इसकी गति धीमी होती है, जिससे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए यह समय-साध्य हो सकती है। इसके साथ ही, ऑपरेटर को उच्च कौशल की जरूरत होती है, और मशीनरी व उपकरण महंगे होते हैं। यह प्रक्रिया बाहरी वातावरण में कम प्रभावी होती है क्योंकि हवा में मौजूद गैस से शील्डिंग प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, यह दो हाथों से संचालित होती है—एक हाथ में टॉर्च और दूसरे में फीलर रॉड—जिससे नए वेल्डर्स के लिए इसे सीखना थोड़ा कठिन हो सकता है।

4. Submerged Arc Welding (SAW)

SAW में एक continuously fed consumable electrode (wire) और workpiece के बीच एक arc बनाया जाता है। यह arc एक granular flux की परत के नीचे होता है। arc की गर्मी से electrode और base metal दोनों पिघलते हैं और एक molten weld pool बनता है। Flux इस molten pool को वातावरण से बचाता है, जिससे oxidation और contamination नहीं होती। Flux आंशिक रूप से पिघलकर slag बनाता है जो वेल्ड को ठंडा होते समय कवर करता है। इसका उपयोग Shipbuilding में बड़े स्टील प्लेट्स की वेल्डिंग में , मोटे स्टील की वेल्डिंग में ऑयल और गैस पाइपलाइन में Railway Track और Wheels Fabrication  Heavy Machine Manufacturing में किया जाता है। इसमे Arc Tempreture लगभग 3500°C से 4000°C और विद्युत धारा DC: 200 – 1200 एम्पीयर AC: 300 – 1000 एम्पीयर
और वोल्टेज लगभाग 28 – 50 वोल्ट इस्तेमाल किया जाता है।

5. Plasma Arc Welding

Plasma Arc Welding (PAW) एक ऐसी वेल्डिंग प्रक्रिया है जिसमें एक non-consumable tungsten electrode और ionized gas (plasma) का उपयोग करके वेल्डिंग की जाती है। इसमें arc एक संकीर्ण, उच्च तापमान वाले प्लाज़्मा जेट के रूप में workpiece पर केंद्रित किया जाता है, जो बहुत गहराई तक सटीक वेल्डिंग करने में सक्षम होता है। PAW को अक्सर TIG Welding का उन्नत रूप माना जाता है, लेकिन इसमें arc को एक nozzle के ज़रिए संकीर्ण और फोकस किया जाता है, जिससे अधिक नियंत्रण और ताकत मिलती है। इसका उपयोग Aerospace components में टाइटेनियम और हाई-निकल अलॉय की वेल्डिंग में, Medical devices में Surgical instruments की शुद्ध वेल्डिंग में, Nuclear industry में हाय-क्वालिटी पाइपिंग सिस्टम में, Electronics industry में Micro-welding applications में किया जाता है।

Gas Welding

गैस वेल्डिंग, जिसे आमतौर पर ऑक्सी-एसेटिलीन वेल्डिंग (Oxy-Acetylene Welding) के नाम से जाना जाता है, एक पारंपरिक लेकिन आज भी लोकप्रिय वेल्डिंग प्रक्रिया है। इस तकनीक में ऑक्सीजन और एसेटिलीन गैस को मिलाकर एक तेज़ और गर्म फ्लेम तैयार किया जाता है, जिसकी मदद से दो धातुओं को पिघलाकर आपस में जोड़ा जाता है। गैस वेल्डिंग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बिजली की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह प्रक्रिया खासकर उन जगहों पर उपयोगी बन जाती है जहाँ बिजली उपलब्ध नहीं होती या सीमित होती है। यह वेल्डिंग प्रक्रिया लगभग 3200°C तक की ऊष्मा प्रदान कर सकती है और इसका उपयोग पतली शीट मेटल्स, पाइप मरम्मत, साइकिल-मोटरसाइकिल जैसे हल्के मेटल स्ट्रक्चर की वेल्डिंग में किया जाता है। गैस वेल्डिंग के लिए कुछ प्रमुख उपकरणों की जरूरत होती है जैसे कि ऑक्सीजन और एसेटिलीन सिलेंडर, प्रेशर रेगुलेटर, टॉर्च, होसेस और वैकल्पिक फिलर रॉड। इसके अलावा, इस प्रक्रिया में उपयोग होने वाली फ्लेम के तीन प्रकार होते हैं — न्यूट्रल, ऑक्सीडाइजिंग और कार्बुराइजिंग फ्लेम, जिनका चयन धातु के प्रकार के अनुसार किया जाता है। गैस वेल्डिंग की सबसे बड़ी खूबी इसकी सरलता, पोर्टेबिलिटी और कम लागत है, हालांकि यह मोटे या कठोर धातुओं के लिए उपयुक्त नहीं होती। फिर भी, यह आज भी घरेलू उपयोग, मरम्मत कार्यों और छोटे उद्योगों में एक विश्वसनीय और प्रभावी विकल्प बनी हुई है।

Thermit Welding

थर्मिट वेल्डिंग एक विशेष प्रकार की वेल्डिंग प्रक्रिया है जो धातुओं को जोड़ने के लिए उच्च तापमान वाली रासायनिक क्रिया (exothermic reaction) का उपयोग करती है। इसमें एक मिश्रण जिसका नाम थर्मिट होता है — आमतौर पर एल्युमिनियम पाउडर और आयरन ऑक्साइड — को जलाया जाता है। यह प्रतिक्रिया इतनी तेज़ और ऊष्मा-उत्पादक होती है कि इसमें लगभग 2500°C से 3000°C तक तापमान पैदा होता है, जो किसी भी स्टील या आयरन को पिघलाने के लिए पर्याप्त होता है। जब यह मिश्रण जलता है, तो उससे निकलने वाला पिघला हुआ लोहा दो धातु के सिरों के बीच डाला जाता है, जिससे वे आपस में जुड़ जाते हैं। इस प्रक्रिया में कोई बाहरी पावर सोर्स या इलेक्ट्रोड की जरूरत नहीं होती, और यह पूरी तरह फ्यूजन बेस्ड होती है। थर्मिट वेल्डिंग का उपयोग खासकर रेलवे ट्रैक जोड़ने, हैवी क्रेन रेल, पाइपलाइन, और मोटे सेक्शन वाली स्टील संरचनाओं को जोड़ने में किया जाता है। यह प्रक्रिया उन जगहों के लिए आदर्श है जहाँ पोर्टेबिलिटी, ताकत और स्थायित्व की ज़रूरत होती है। हालाँकि, इसे करने के लिए विशेष सावधानी और ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है क्योंकि इसमें उच्च तापमान और पिघले हुए धातु का सीधे उपयोग होता है। थर्मिट वेल्डिंग की सबसे खास बात यह है कि यह जोड़ को बेहद मजबूत और टिकाऊ बनाती है, और इसमें किसी अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत या भारी मशीन की आवश्यकता नहीं होती।

Electron Beam Welding (EBW)

Electron Beam Welding (EBW) एक अत्यधिक उन्नत और प्रिसीजन वेल्डिंग तकनीक है जिसमें धातुओं को जोड़ने के लिए उच्च गति से चलने वाली इलेक्ट्रॉनों की एक केंद्रित बीम का उपयोग किया जाता है। यह बीम इलेक्ट्रॉनों को वैक्यूम चैंबर में तेजी से प्रवाहित करके उत्पन्न की जाती है, और जब ये इलेक्ट्रॉन किसी धातु की सतह से टकराते हैं, तो उनकी गतिज ऊर्जा (kinetic energy) हीट एनर्जी में बदल जाती है। यह गर्मी इतनी अधिक होती है कि यह मेटल को स्थानीय रूप से पिघला देती है और गहराई तक फ्यूजन कर देती है। चूँकि यह प्रक्रिया पूरी तरह से वैक्यूम में की जाती है, इसलिए इसमें ऑक्सीकरण या गैस से जुड़ी कोई अशुद्धता नहीं होती, जिससे वेल्ड की गुणवत्ता बहुत उच्च स्तर की होती है। EBW को विशेष रूप से वहाँ इस्तेमाल किया जाता है जहाँ माइक्रो-जोड़, गहराई वाली वेल्ड, या संकरी जगहों में सटीकता की आवश्यकता होती है — जैसे कि एयरोस्पेस, न्यूक्लियर, डिफेंस, मेडिकल डिवाइसेज़ और हाई-टेक मशीनिंग क्षेत्रों में। इस प्रक्रिया के लिए एक वैक्यूम चैंबर, इलेक्ट्रॉन गन, उच्च वोल्टेज पावर सप्लाई और कंट्रोल सिस्टम की जरूरत होती है। EBW आमतौर पर 0.1 mm से लेकर कई इंच मोटे मेटल तक को आसानी से वेल्ड कर सकता है, वो भी बिना फिलर मटेरियल के। इसकी खासियत यह है कि यह बहुत साफ, मजबूत और गहरी वेल्ड देता है, जिसमें हीट-अफेक्टेड ज़ोन (HAZ) भी बहुत कम होता है। हालांकि, इसकी मशीनरी महंगी होती है और इसका उपयोग केवल क्लीन, कंट्रोल्ड वातावरण में संभव है,

Solid-State Welding (ठोस अवस्था वेल्डिंग)

Friction Welding (FW)

Friction Welding एक solid-state वेल्डिंग प्रक्रिया है जिसमें दो धातुओं को आपस में घिसने से उत्पन्न गर्मी और दबाव से जोड़ा जाता है। इसमें कोई filler metal, गैस या फ्लक्स की जरूरत नहीं होती। जब एक मेटल को घुमाया जाता है और दूसरा स्थिर रखा जाता है, तो उनके बीच घर्षण से ताप पैदा होता है। यह ताप धातु की सतहों को नरम करता है और axial force लगाने से दोनों धातुएं जुड़ जाती हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से ट्यूब, शाफ्ट, रॉड्स और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में किया जाता है।

Friction Stir Welding (FSW)

Friction Stir Welding भी एक solid-state वेल्डिंग तकनीक है, लेकिन इसमें दो मेटलों को जोड़ने के लिए एक घूमने वाला non-consumable टूल प्रयोग किया जाता है। यह टूल मेटल के जॉइंट पर घुमाया और दबाया जाता है, जिससे घर्षण और प्लास्टिक डिफॉर्मेशन के ज़रिए दोनों मेटल आपस में मिक्स होकर जुड़ जाते हैं। FSW में धातु नहीं पिघलती, जिससे वेल्ड की ताकत और सफाई बेहतर होती है। यह प्रक्रिया खासकर एल्युमिनियम, मैग्नीशियम जैसी हल्की धातुओं के लिए बहुत उपयोगी है। इसका उपयोग aerospace, marine, और railway sectors में होता है।

Cold Welding

Cold Welding एक ऐसी अनोखी वेल्डिंग प्रक्रिया है जिसमें धातुओं को जोड़ने के लिए बिलकुल भी गर्मी नहीं दी जाती। इसमें साफ और ऑक्साइड-फ्री मेटल सतहों को बहुत अधिक दबाव से आपस में चिपकाया जाता है, जिससे उनके परमाणु स्तर पर बॉन्ड बन जाते हैं। यह प्रक्रिया आमतौर पर ductile और soft धातुओं जैसे कॉपर, एल्युमिनियम और गोल्ड पर की जाती है। Cold Welding का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, वायरिंग और वैक्यूम सिस्टम्स में किया जाता है। यह एक highly precise और contamination-free जॉइनिंग टेक्निक है।

Diffusion Welding

Diffusion Welding एक solid-state प्रक्रिया है जिसमें दो मेटल सतहों को उच्च तापमान (बिना पिघलाए) और लंबे समय तक दबाव में रखा जाता है, जिससे उनके परमाणु आपस में मिलकर स्थायी जॉइंट बनाते हैं। यह प्रक्रिया वैक्यूम या inert gas वातावरण में की जाती है ताकि ऑक्सिडेशन से बचा जा सके। इसे विशेष रूप से high-strength और high-integrity जोड़ बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। Aerospace, nuclear और electronics उद्योगों में इसका उपयोग आम है। यह प्रक्रिया बहुत धीमी होती है लेकिन extremely मजबूत और साफ वेल्ड देती है।

Ultrasonic Welding

Ultrasonic Welding एक तेज़ और सटीक प्रक्रिया है जिसमें high-frequency ultrasonic कंपन (vibrations) का उपयोग करके दो धातु या प्लास्टिक हिस्सों को आपस में जोड़ा जाता है। कंपन से उत्पन्न घर्षण गर्मी, मेटल की सतहों को locally soften कर देती है और उनके परमाणु स्तर पर फ्यूजन हो जाता है। यह प्रक्रिया खासकर पतली शीट्स, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और मेडिकल डिवाइसेज़ में इस्तेमाल की जाती है। इसकी खासियत है कि यह बहुत तेज़, साफ और ऊर्जा-कुशल होती है, और इसमें कोई filler material नहीं चाहिए। प्लास्टिक इंडस्ट्री में इसका बहुत व्यापक उपयोग है।

Explosion Welding

Explosion Welding एक solid-state प्रक्रिया है जिसमें विस्फोट (controlled explosion) की शक्ति का उपयोग करके एक धातु को दूसरी पर बहुत तेजी से टकराया जाता है। इससे दोनों मेटल की सतहें आपस में फ्यूज हो जाती हैं, बिना पिघले हुए। यह तकनीक dissimilar metals को जोड़ने के लिए बेहद उपयोगी है, जैसे कॉपर और स्टील, टाइटेनियम और एल्यूमिनियम। Explosion welding से बने जॉइंट्स बहुत मजबूत और स्थायी होते हैं। इसका उपयोग आमतौर पर metal cladding, pressure vessels और chemical equipment में किया जाता है।

Forge Welding

Forge Welding सबसे पुरानी वेल्डिंग तकनीकों में से एक है जिसमें धातुओं को गर्म करके और हथौड़े से मारकर जोड़ा जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह मैन्युअल होती है और किसी बिजली या गैस की जरूरत नहीं पड़ती। धातु को लाल-गर्म किया जाता है और फिर दोनों हिस्सों को हथौड़े या प्रेस की मदद से जोड़ दिया जाता है। यह तकनीक आज भी ब्लैकस्मिथिंग, पारंपरिक औजार निर्माण और आर्टवर्क में इस्तेमाल होती है। हालांकि यह आधुनिक उद्योगों में कम उपयोग होती है, लेकिन low-tech और rural settings में अभी भी भरोसेमंद मानी जाती है।

उम्मीद है कि आपको यह ब्लॉग पसंद आया होगा और वेल्डिंग के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली होगी। ऐसे ही तकनीकी विषयों पर पढ़ते रहने के लिए जुड़े रहिए। नीचे कमेंट कर के बताइए कि आपको यह जानकारी कैसी लगी!

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