What is Induction Motor? Details Explanation

इंडक्शन मोटर (Induction Motor)

परिचय

इंडक्शन मोटर विद्युत अभियांत्रिकी की सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली मोटर है। उद्योगों, घरेलू उपकरणों, कृषि पंपों, पंखों, कंप्रेसर, कन्वेयर बेल्ट तथा मशीन टूल्स में इंडक्शन मोटर का व्यापक उपयोग किया जाता है। इसकी सरल संरचना, कम लागत, मजबूत निर्माण तथा कम रखरखाव के कारण यह मोटर विश्व की सबसे लोकप्रिय मोटर मानी जाती है। इंडक्शन मोटर को असिंक्रोनस मोटर (Asynchronous Motor) भी कहा जाता है क्योंकि इसकी गति कभी भी समकालिक गति (Synchronous Speed) के बराबर नहीं होती। इस लेख में हम इंडक्शन मोटर के सिद्धांत, निर्माण, कार्य, स्लिप, टॉर्क, प्रकार, स्टार्टिंग विधियाँ, हानियाँ, दक्षता, अनुप्रयोग तथा परीक्षा व साक्षात्कार से जुड़े प्रश्नों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

इंडक्शन मोटर की परिभाषा

इंडक्शन मोटर वह विद्युत मोटर है जिसमें रोटर धारा सीधे आपूर्ति से नहीं ली जाती बल्कि चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) द्वारा उत्पन्न की जाती है। इसी कारण इसे इंडक्शन मोटर कहा जाता है। मुख्य विशेषता: यह AC पर कार्य करती है रोटर में धारा प्रेरण द्वारा उत्पन्न होती है गति हमेशा समकालिक गति से कम होती है

इंडक्शन मोटर का सिद्धांत (Principle of Induction Motor)

इंडक्शन मोटर का कार्य सिद्धांत विद्युत चुंबकीय प्रेरण पर आधारित है। जब स्टेटर वाइंडिंग में तीन-फेज या सिंगल-फेज AC सप्लाई दी जाती है, तो एक घूर्णनशील चुंबकीय क्षेत्र (Rotating Magnetic Field) उत्पन्न होता है। यह चुंबकीय क्षेत्र रोटर को काटता है, जिससे रोटर में EMF और धारा प्रेरित होती है। रोटर धारा और स्टेटर फ्लक्स के पारस्परिक प्रभाव से रोटर पर बल उत्पन्न होता है और वह घूमने लगता है।

महत्वपूर्ण बिंदु:

यदि रोटर की गति फ्लक्स की गति के बराबर हो जाए तो प्रेरण समाप्त हो जाएगी इसलिए रोटर की गति सदैव समकालिक गति से कम रहती है

समकालिक गति (Synchronous Speed)

समकालिक गति वह गति है जिस पर चुंबकीय क्षेत्र घूमता है।

सूत्र:

Ns = (120 × f) / P

जहाँ,
Ns = समकालिक गति (RPM)
f = आपूर्ति की आवृत्ति (Hz)
P = ध्रुवों की संख्या

स्लिप (Slip)

स्लिप वह अनुपात है जो समकालिक गति और रोटर गति के अंतर को दर्शाता है।

सूत्र:

Slip (s) = (Ns − Nr) / Ns

जहाँ,
Nr = रोटर गति

स्टार्ट के समय स्लिप = 1
पूर्ण लोड पर स्लिप = 2% से 5%

इंडक्शन मोटर का निर्माण (Construction of Induction Motor)

इंडक्शन मोटर के मुख्य भाग:

1. स्टेटर (Stator) – स्टेटर मोटर का स्थिर भाग होता है। इसमें स्लॉट बने होते हैं जिनमें तांबे की कुंडलियाँ रखी जाती हैं। जब इन कुंडलियों में AC सप्लाई दी जाती है, तो घूर्णनशील चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।

2. रोटर (Rotor) – रोटर मोटर का घूमने वाला भाग होता है। इसके दो मुख्य प्रकार होते हैं:

(क) स्क्विरल केज रोटर – एल्यूमिनियम या तांबे की छड़ें सरल, मजबूत और कम लागत, कम रखरखाव

(ख) स्लिप रिंग रोटर – वाइंडिंग रोटर बाहरी प्रतिरोध जोड़ा जा सकता है अधिक प्रारंभिक टॉर्क

3. एयर गैप (Air Gap) – स्टेटर और रोटर के बीच छोटा अंतर होता है जिसे एयर गैप कहते हैं। यह चुंबकीय फ्लक्स के संचरण में सहायता करता है।

4. बेयरिंग और शाफ्ट – रोटर को घूमने में सहायता करते हैं और यांत्रिक संतुलन बनाए रखते हैं।

इंडक्शन मोटर का कार्य (Working of Induction Motor)

  • स्टेटर में AC सप्लाई दी जाती है
  • घूर्णनशील चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है
  • यह फ्लक्स रोटर को काटता है
  • रोटर में EMF और धारा प्रेरित होती है
  • रोटर धारा और फ्लक्स के कारण बल उत्पन्न होता है
  • रोटर घूमने लगता है
  • गति समकालिक गति से कम रहती है

टॉर्क (Torque)

टॉर्क वह घूर्णन बल है जो मोटर द्वारा उत्पन्न किया जाता है।

टॉर्क का सूत्र:

T ∝ (sE²R2) / [(R2/s)² + X2²]

जहाँ,
R2 = रोटर प्रतिरोध
X2 = रोटर रिएक्टेंस

टॉर्क-स्लिप विशेषता (Torque-Slip Characteristic)

तीन प्रमुख अवस्थाएँ:

1. स्टार्टिंग टॉर्क

जब मोटर स्थिर होती है, स्लिप = 1

2. मैक्सिमम टॉर्क (Breakdown Torque)

इसे पुल-आउट टॉर्क भी कहते हैं
लोड बढ़ने पर भी मोटर रुकती नहीं

3. नॉर्मल रनिंग

स्लिप कम, टॉर्क स्थिर

इंडक्शन मोटर के प्रकार

1. फेज के आधार पर

(क) सिंगल फेज इंडक्शन मोटर – पंखा, कूलर, वॉशिंग मशीन

(ख) थ्री फेज इंडक्शन मोटर– उद्योग,पंप, कंप्रेसर

2. रोटर के आधार पर

  • स्क्विरल केज मोटर
  • स्लिप रिंग मोटर

स्टार्टिंग विधियाँ (Starting Methods)

1. डायरेक्ट ऑन लाइन (DOL)

  • सरल विधि
  • अधिक स्टार्टिंग करंट

2. स्टार-डेल्टा स्टार्टर

  • स्टार्ट में करंट कम
  • उद्योगों में प्रचलित

3. ऑटो ट्रांसफॉर्मर स्टार्टर

  • वोल्टेज नियंत्रित
  • मध्यम आकार की मोटर

4. रोटर रेसिस्टेंस स्टार्टर (Slip Ring)

  • उच्च प्रारंभिक टॉर्क
  • भारी लोड में उपयोग

हानियाँ (Losses in Induction Motor)

1. कॉपर लॉस – स्टेटर और रोटर वाइंडिंग में

2. आयरन लॉस – हिस्टेरिसिस और एडी करंट

3. मैकेनिकल लॉस – फ्रिक्शन और वेंटिलेशन

दक्षता (Efficiency)

η = आउटपुट पावर / इनपुट पावर × 100

इंडक्शन मोटर की दक्षता सामान्यतः 85% से 95% होती है।

पावर फैक्टर – स्टार्ट पर कम, लोड बढ़ने पर सुधरता है

अनुप्रयोग (Applications) – इंडक्शन मोटर का उपयोग आज के आधुनिक जीवन और उद्योगों में बहुत व्यापक रूप से किया जाता है। उद्योगों में इसका प्रयोग पंप, कंप्रेसर, कन्वेयर बेल्ट, क्रेन, लिफ्ट और मशीन टूल्स को चलाने के लिए किया जाता है, क्योंकि यह मोटर लगातार और भरोसेमंद प्रदर्शन देती है। घरेलू क्षेत्र में इंडक्शन मोटर पंखे, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और मिक्सर जैसे उपकरणों में इस्तेमाल होती है। कृषि क्षेत्र में इसका उपयोग पानी के पंप और सिंचाई प्रणालियों में किया जाता है, जिससे किसानों को बड़ी सुविधा मिलती है। सरल संरचना, कम रखरखाव और लंबी आयु के कारण इंडक्शन मोटर औद्योगिक और घरेलू दोनों क्षेत्रों की रीढ़ मानी जाती है।

लाभ– इंडक्शन मोटर के कई महत्वपूर्ण लाभ होते हैं। यह मोटर बनावट में सरल और मजबूत होती है, इसलिए इसकी लागत कम होती है और रखरखाव भी बहुत कम करना पड़ता है। इसमें ब्रश या कम्यूटेटर नहीं होते, जिस कारण स्पार्किंग नहीं होती और मोटर अधिक सुरक्षित व भरोसेमंद रहती है। इंडक्शन मोटर की दक्षता (efficiency) अच्छी होती है और यह लगातार लंबे समय तक बिना रुके काम कर सकती है। यह मोटर AC सप्लाई पर सीधे चल सकती है, जिससे इसे उद्योगों में उपयोग करना आसान हो जाता है। इसी कारण इंडक्शन मोटर का उपयोग फैक्ट्रियों, पंप, पंखे, कंप्रेसर और घरेलू उपकरणों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

निष्कर्ष

इंडक्शन मोटर आधुनिक उद्योगों की रीढ़ है। इसकी सरलता, मजबूती और उच्च विश्वसनीयता इसे सबसे लोकप्रिय मोटर बनाती है। प्रत्येक विद्युत अभियंता और छात्र के लिए इंडक्शन मोटर का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यही मोटर वास्तविक औद्योगिक जीवन में सबसे अधिक उपयोग होती है।

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