थ्री फेज सिस्टम (Three Phase System)
परिचय(Introduction)
आधुनिक विद्युत शक्ति प्रणाली का आधार थ्री फेज सिस्टम है। उत्पादन केंद्र से लेकर उद्योगों, मोटरों, ट्रांसमिशन लाइन और बड़े विद्युत उपभोक्ताओं तक लगभग सम्पूर्ण उच्च शक्ति आपूर्ति थ्री फेज प्रणाली द्वारा ही की जाती है। यदि आज की औद्योगिक क्रांति संभव हो पाई है, तो उसके पीछे थ्री फेज सिस्टम का बहुत बड़ा योगदान है।
थ्री फेज सिस्टम की विशेषता यह है कि यह निरंतर, संतुलित और अधिक शक्ति प्रदान करता है, जिससे मोटर स्मूद चलती है, ट्रांसमिशन लॉस कम होते हैं और सिस्टम अधिक कुशल बनता है। इस लेख में हम थ्री फेज सिस्टम की परिभाषा, सिद्धांत, निर्माण, वेवफॉर्म, कनेक्शन, लाइन और फेज मात्राएँ, शक्ति समीकरण, लाभ, सीमाएँ, अनुप्रयोग तथा परीक्षा व साक्षात्कार से जुड़े प्रश्नों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
थ्री फेज सिस्टम की परिभाषा
थ्री फेज सिस्टम वह AC प्रणाली है जिसमें तीन वैकल्पिक वोल्टेज या धारा एक-दूसरे से 120° के कोण से विस्थापित होते हैं और समान आवृत्ति तथा परिमाण के होते हैं। bसरल शब्दों में, तीन अलग-अलग AC सप्लाई जो समय के साथ क्रमशः उत्पन्न होती हैं, थ्री फेज सिस्टम कहलाती हैं।
मुख्य विशेषताएँ:
- तीन एसी वोल्टेज – तीनों फेज का परिमाण समान होता है और इनके बीच 120° का फेज अंतर होता है।
- लगातार शक्ति आपूर्ति – पावर में उतार-चढ़ाव कम होता है, जिससे मशीनें स्मूथ चलती हैं।
- उच्च दक्षता – सिंगल फेज की तुलना में अधिक एफिशिएंट सिस्टम।
- कम शक्ति हानि – ट्रांसमिशन के दौरान लाइन लॉस कम होता है।
- आर्थिक प्रणाली – कम कंडक्टर सामग्री में अधिक शक्ति का संप्रेषण संभव।
- बेहतर मोटर प्रदर्शन – मोटर का टॉर्क अधिक और स्टार्टिंग बेहतर होती है।
- भारी लोड के लिए उपयुक्त – बड़े उद्योगों और मशीनों के लिए आदर्श।
सिंगल फेज प्रणाली में शक्ति असंतुलित होती है तथा मोटर में कंपन और टॉर्क में उतार-चढ़ाव होता है। भारी लोड, मोटर और उद्योगों के लिए सिंगल फेज उपयुक्त नहीं होता।
थ्री फेज सिस्टम की आवश्यकता (Need of Three Phase System)
आधुनिक विद्युत प्रणाली में थ्री फेज सिस्टम की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि यह अधिक शक्ति को कुशल, सुरक्षित और किफायती तरीके से संभाल सकता है। जब बड़े उद्योगों, फैक्ट्रियों और भारी मशीनों को चलाने की बात आती है, तब सिंगल फेज सिस्टम पर्याप्त नहीं होता। थ्री फेज सिस्टम में शक्ति आपूर्ति लगभग निरंतर बनी रहती है, जिससे मोटर और अन्य उपकरण बिना रुकावट और कंपन के सुचारु रूप से कार्य करते हैं। इसके कारण मशीनों की कार्यक्षमता बढ़ती है और उनका जीवनकाल भी लंबा होता है।
थ्री फेज सिस्टम की आवश्यकता विद्युत संप्रेषण (transmission) में भी होती है, क्योंकि इसमें समान शक्ति के लिए कम करंट की जरूरत पड़ती है। कम करंट होने से लाइन लॉस (I²R हानि) कम होती है और तारों का आकार छोटा रखा जा सकता है, जिससे पूरी प्रणाली आर्थिक और ऊर्जा-दक्ष बनती है। लंबी दूरी तक बिजली भेजने में यह प्रणाली अधिक विश्वसनीय होती है और वोल्टेज ड्रॉप भी कम होता है।उद्योगों में प्रयुक्त थ्री फेज इंडक्शन मोटर इसी सिस्टम पर आधारित होती हैं, जो उच्च टॉर्क, बेहतर दक्षता और कम रखरखाव प्रदान करती हैं। इसके अलावा थ्री फेज सिस्टम से सिंगल फेज सप्लाई भी प्राप्त की जा सकती है, जिससे घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को बिजली देना आसान हो जाता है। इन सभी कारणों से थ्री फेज सिस्टम को आधुनिक विद्युत उत्पादन, वितरण और औद्योगिक विकास की आवश्यक नींव माना जाता है।
थ्री फेज सिस्टम का सिद्धांत (Principle of Three Phase System)
थ्री फेज सिस्टम का कार्य सिद्धांत इस तथ्य पर आधारित होता है कि इसमें तीन एसी वोल्टेज या करंट उत्पन्न होते हैं, जिनका परिमाण समान होता है लेकिन उनके बीच 120 डिग्री का फेज अंतर होता है। जब ये तीनों फेज एक साथ किसी लोड से जुड़े होते हैं, तो वे मिलकर एक लगातार और संतुलित विद्युत शक्ति प्रदान करते हैं। इस प्रणाली में प्रत्येक फेज अलग-अलग समय पर अपनी अधिकतम और न्यूनतम मान तक पहुँचता है, जिससे कुल शक्ति कभी शून्य नहीं होती। यही कारण है कि थ्री फेज सिस्टम सिंगल फेज सिस्टम की तुलना में अधिक स्थिर और प्रभावी होता है।
जब थ्री फेज सप्लाई किसी मोटर को दी जाती है, तो तीनों फेज की धाराएँ मिलकर घूमता हुआ चुंबकीय क्षेत्र (Rotating Magnetic Field) उत्पन्न करती हैं। यही घूमता हुआ चुंबकीय क्षेत्र मोटर के रोटर में विद्युत धारा प्रेरित करता है, जिससे रोटर पर टॉर्क उत्पन्न होता है और मोटर लगातार घूमती रहती है। इस प्रक्रिया में मोटर को अलग से स्टार्टिंग मैकेनिज्म की आवश्यकता नहीं होती और मोटर स्मूथ तरीके से चलती है।थ्री फेज सिस्टम में शक्ति का संप्रेषण भी अधिक कुशल होता है क्योंकि तीनों फेज मिलकर लोड को संतुलित रखते हैं। इससे करंट का वितरण समान रहता है, लाइन लॉस कम होता है और पूरी प्रणाली अधिक विश्वसनीय बनती है। इसी सिद्धांत के कारण थ्री फेज सिस्टम का उपयोग विद्युत उत्पादन, ट्रांसमिशन और औद्योगिक मशीनों में व्यापक रूप से किया जाता है।
थ्री फेज सिस्टम में तीन अलग-अलग वोल्टेज उत्पन्न होते हैं जो समय के साथ 120° के कोण से विस्थापित रहते हैं। जब ये तीनों वोल्टेज किसी लोड से जुड़े होते हैं, तो उनका संयुक्त प्रभाव एक निरंतर घूर्णनशील चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।
थ्री फेज वेवफॉर्म (Three Phase Waveform)
तीन-फेज़ वेवफॉर्म को सामान्यतः साइन वेव के रूप में दर्शाया जाता है, जिसमें तीन साइन तरंगें एक-दूसरे से बराबर दूरी पर खिसकी हुई दिखाई देती हैं। यदि इन तरंगों को ग्राफ पर समय (Time) के साथ प्लॉट किया जाए, तो वे एक नियमित और आवर्ती पैटर्न बनाती हैं। प्रत्येक फेज़ का चक्र पूरा होने में समान समय लगता है, और तीनों मिलकर ऐसा प्रभाव पैदा करते हैं मानो विद्युत शक्ति कभी शून्य न हो रही हो। यही कारण है कि तीन-फेज़ सप्लाई से चलने वाली मोटरें एक-फेज़ की तुलना में अधिक स्थिर टॉर्क देती हैं और कंपन कम होता है।
तीन-फेज़ वेवफॉर्म का एक बड़ा लाभ यह है कि इसमें पावर डिलीवरी लगभग निरंतर बनी रहती है। एक-फेज़ सिस्टम में पावर शून्य के पास पहुँचती है, लेकिन तीन-फेज़ सिस्टम में तीनों तरंगें मिलकर कुल शक्ति को लगभग स्थिर बनाए रखती हैं। इससे ट्रांसमिशन में नुकसान कम होता है और कम कंडक्टर में अधिक शक्ति भेजी जा सकती है। इसी वजह से लंबी दूरी की बिजली आपूर्ति और भारी उद्योगों में तीन-फेज़ प्रणाली को प्राथमिकता दी जाती है।
संक्षेप में, तीन-फेज़ वेवफॉर्म तीन समान साइन तरंगों का ऐसा संयोजन है जिनके बीच 120 डिग्री का फेज़ अंतर होता है और जो मिलकर एक स्थिर, कुशल और संतुलित विद्युत आपूर्ति प्रदान करते हैं। यह प्रणाली आधुनिक विद्युत इंजीनियरिंग की रीढ़ मानी जाती है और इसके बिना बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास की कल्पना करना कठिन है।
थ्री फेज सिस्टम के प्रकार
तीन-फेज़ प्रणाली (Three Phase System) को उसके कनेक्शन और उपयोग के आधार पर मुख्य रूप से कुछ प्रमुख प्रकारों में बाँटा जाता है। ये प्रकार विद्युत उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण में अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार उपयोग किए जाते हैं। नीचे तीन-फेज़ सिस्टम के प्रमुख प्रकारों को अलग-अलग पैराग्राफ में विस्तार से समझाया गया है, जो आप अपने ब्लॉग में सीधे उपयोग कर सकते हैं।
स्टार कनेक्शन (Star या Y Connection)
स्टार कनेक्शन में तीनों फेज़ के एक-एक सिरे को आपस में जोड़कर एक सामान्य बिंदु बनाया जाता है, जिसे न्यूट्रल प्वाइंट कहते हैं। बाकी तीन सिरे बाहरी लाइनों से जुड़े होते हैं, जिन्हें लाइन टर्मिनल कहा जाता है। इस प्रणाली में लाइन वोल्टेज, फेज़ वोल्टेज से √3 गुना अधिक होता है, जबकि लाइन करंट और फेज़ करंट समान रहते हैं। स्टार कनेक्शन का बड़ा लाभ यह है कि इसमें न्यूट्रल वायर उपलब्ध होता है, जिससे एक ही सिस्टम से एक-फेज़ और तीन-फेज़ दोनों तरह की सप्लाई ली जा सकती है। इसी कारण घरेलू और वितरण प्रणाली में स्टार कनेक्शन का व्यापक उपयोग किया जाता है, जहाँ अलग-अलग वोल्टेज स्तर की आवश्यकता होती है।
मुख्य सूत्र इस प्रकार हैं:
लाइन वोल्टेज (VL) = √3 × फेज़ वोल्टेज (Vph)
लाइन करंट (IL) = फेज़ करंट (Iph)
तीन-फेज़ शक्ति (Power) = √3 × VL × IL × cosφ
डेल्टा कनेक्शन (Delta या Δ Connection)
डेल्टा कनेक्शन में तीनों फेज़ को सिरा-से-सिरा जोड़कर एक बंद त्रिभुज (त्रिकोण) का रूप दिया जाता है। इसमें कोई न्यूट्रल प्वाइंट नहीं होता और केवल तीन लाइन वायर ही बाहर निकलते हैं। इस प्रणाली में लाइन वोल्टेज और फेज़ वोल्टेज समान होते हैं, जबकि लाइन करंट, फेज़ करंट से √3 गुना अधिक होता है। डेल्टा कनेक्शन का मुख्य लाभ यह है कि यह अधिक करंट वहन कर सकता है और मोटरों को अधिक टॉर्क प्रदान करता है। इसलिए भारी औद्योगिक मोटरों, पंपों और मशीन टूल्स में डेल्टा कनेक्शन का अधिक प्रयोग किया जाता है, जहाँ मजबूत और निरंतर शक्ति की आवश्यकता होती है।
मुख्य सूत्र इस प्रकार हैं:
लाइन वोल्टेज (VL) = फेज़ वोल्टेज (Vph)
लाइन करंट (IL) = √3 × फेज़ करंट (Iph)
तीन-फेज़ शक्ति (Power) = √3 × VL × IL × cosφ
तीन-तार प्रणाली (Three Wire System)
तीन-तार तीन-फेज़ प्रणाली में केवल तीन लाइन कंडक्टर होते हैं और कोई न्यूट्रल वायर नहीं होता। यह व्यवस्था सामान्यतः डेल्टा कनेक्शन या संतुलित स्टार कनेक्शन में उपयोग की जाती है, जहाँ लोड तीनों फेज़ पर समान रूप से वितरित होता है। इस प्रकार की प्रणाली का लाभ यह है कि इसमें कम कंडक्टर की आवश्यकता होती है, जिससे लागत कम आती है और ट्रांसमिशन अधिक किफायती बनता है। हालांकि, इसमें एक-फेज़ लोड सीधे नहीं जोड़ा जा सकता, इसलिए इसका उपयोग मुख्य रूप से औद्योगिक और उच्च शक्ति वाले उपकरणों के लिए किया जाता है।
सामान्य शक्ति सूत्र है:
P = √3 × VL × IL × cosφ
जहाँ P = कुल शक्ति (वॉट में),
VL = लाइन वोल्टेज,
IL = लाइन करंट,
cosφ = पावर फैक्टर।
चार-तार प्रणाली (Three Phase Four Wire System)
चार-तार तीन-फेज़ प्रणाली (Star with Neutral) के सूत्र सहित विवरण
चार-तार तीन-फेज़ प्रणाली में तीन लाइन कंडक्टर और एक न्यूट्रल कंडक्टर होता है। यह व्यवस्था सामान्यतः स्टार कनेक्शन में अपनाई जाती है, जहाँ तीनों फेज़ का एक सिरा न्यूट्रल से जुड़ा होता है। इस प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे एक ही सप्लाई से तीन-फेज़ और एक-फेज़ दोनों प्रकार के लोड चलाए जा सकते हैं। प्रत्येक फेज़ और न्यूट्रल के बीच का वोल्टेज फेज़ वोल्टेज कहलाता है, जबकि दो लाइनों के बीच का वोल्टेज लाइन वोल्टेज होता है। स्टार कनेक्शन के नियम यहाँ भी लागू होते हैं, इसलिए लाइन वोल्टेज फेज़ वोल्टेज से √3 गुना होता है और लाइन करंट फेज़ करंट के बराबर होता है।
मुख्य सूत्र इस प्रकार हैं:
लाइन वोल्टेज (VL) = √3 × फेज़ वोल्टेज (Vph)
फेज़ वोल्टेज (Vph) = VL / √3
लाइन करंट (IL) = फेज़ करंट (Iph)
न्यूट्रल करंट का सूत्र (Neutral Current Formula)
यदि तीनों फेज़ पर लोड संतुलित (Balanced) हो, तो तीनों फेज़ करंट का वेक्टर योग शून्य होता है और न्यूट्रल करंट लगभग शून्य माना जाता है।
संतुलित स्थिति में:
IN ≈ 0
यदि सिस्टम असंतुलित (Unbalanced) हो, तो न्यूट्रल करंट तीनों फेज़ करंटों का वेक्टर योग होता है:
IN = √( IA² + IB² + IC² − IA·IB − IB·IC − IC·IA )
जहाँ IA, IB, IC तीनों फेज़ के करंट हैं।
चार-तार प्रणाली की कुल शक्ति का सूत्र
चार-तार प्रणाली में भी कुल तीन-फेज़ शक्ति का सामान्य सूत्र वही रहता है:
P = √3 × VL × IL × cosφ
यदि अलग-अलग फेज़ पर अलग-अलग एक-फेज़ लोड जुड़े हों, तो कुल शक्ति तीनों फेज़ की शक्तियों का योग होती है:
Ptotal = PA + PB + PC
जहाँ
PA = Vph × IA × cosφA
PB = Vph × IB × cosφB
PC = Vph × IC × cosφC
संतुलित और असंतुलित तीन-फेज़ प्रणाली (Balanced and Unbalanced System)
संतुलित तीन-फेज़ प्रणाली वह होती है जिसमें तीनों फेज़ का वोल्टेज, करंट और लोड समान होता है तथा उनके बीच का फेज़ अंतर ठीक 120 डिग्री रहता है। ऐसी स्थिति में न्यूट्रल करंट लगभग शून्य होता है और प्रणाली अत्यंत स्थिर व कुशल रूप से कार्य करती है। इसके विपरीत, असंतुलित प्रणाली में तीनों फेज़ पर लोड समान नहीं होता, जिससे वोल्टेज और करंट में असमानता आ जाती है। इससे सिस्टम में नुकसान बढ़ सकता है और उपकरणों पर अतिरिक्त तनाव पड़ता है। इसलिए व्यवहार में संतुलित प्रणाली बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।
इन सभी प्रकारों का चयन उपयोग के क्षेत्र, लोड की प्रकृति और आवश्यक वोल्टेज स्तर के अनुसार किया जाता है। तीन-फेज़ प्रणाली के ये प्रकार आधुनिक विद्युत वितरण और औद्योगिक विकास की आधारशिला माने जाते हैं।
थ्री फेज सिस्टम के लाभ
- निरंतर और स्थिर शक्ति आपूर्ति
- तीन-फेज़ प्रणाली में तीनों फेज़ 120 डिग्री के अंतर पर होते हैं, जिससे कुल विद्युत शक्ति लगभग लगातार बनी रहती है। एक-फेज़ प्रणाली में शक्ति हर चक्र में शून्य के पास पहुँच जाती है, लेकिन तीन-फेज़ में ऐसा नहीं होता। इसका लाभ यह है कि मोटर और अन्य उपकरण बिना झटके के स्मूद तरीके से चलते हैं, कंपन कम होता है और मशीनों की कार्यक्षमता बढ़ जाती है।
- मोटरों में उच्च प्रारंभिक टॉर्क और बेहतर प्रदर्शन
तीन-फेज़ सप्लाई से चलने वाली मोटरें स्वयं प्रारंभ हो जाती हैं और उन्हें अलग से स्टार्टिंग डिवाइस की आवश्यकता नहीं होती। इनमें एक-फेज़ मोटरों की तुलना में प्रारंभिक टॉर्क अधिक होता है, जिससे भारी लोड वाली मशीनें आसानी से चालू हो जाती हैं। यही कारण है कि उद्योगों में लगभग सभी बड़े मोटर तीन-फेज़ पर ही चलाए जाते हैं। - कम कंडक्टर में अधिक शक्ति का ट्रांसमिशन
तीन-फेज़ प्रणाली में समान शक्ति भेजने के लिए एक-फेज़ प्रणाली की तुलना में कम ताँबे या एल्युमिनियम के कंडक्टर की आवश्यकता होती है। इससे ट्रांसमिशन लाइन की लागत कम होती है और लाइन लॉस भी घटता है। यही कारण है कि लंबी दूरी की बिजली आपूर्ति में तीन-फेज़ प्रणाली सबसे अधिक किफायती मानी जाती है। - उच्च दक्षता और कम ऊर्जा हानि
तीन-फेज़ सिस्टम में पावर फैक्टर बेहतर रहता है और करंट का वितरण संतुलित होता है, जिससे I²R हानियाँ कम होती हैं। ट्रांसफॉर्मर, मोटर और जनरेटर जैसे उपकरण अधिक दक्षता से कार्य करते हैं। लंबे समय में इससे ऊर्जा की बचत होती है और बिजली की कुल लागत भी कम पड़ती है। - एक ही सिस्टम से एक-फेज़ और तीन-फेज़ दोनों सप्लाई संभव
- चार-तार तीन-फेज़ प्रणाली में न्यूट्रल उपलब्ध होने के कारण एक ही सप्लाई से घरेलू एक-फेज़ लोड और औद्योगिक तीन-फेज़ लोड दोनों चलाए जा सकते हैं। इससे अलग-अलग लाइन बिछाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और वितरण प्रणाली सरल तथा लचीली बनती है।
- मोटरों का आकार छोटा और वजन कम होता है
समान शक्ति के लिए तीन-फेज़ मोटर का आकार और वजन एक-फेज़ मोटर की तुलना में कम होता है। इससे मशीनों की डिजाइन कॉम्पैक्ट बनती है, जगह की बचत होती है और सामग्री की लागत भी घटती है। यही कारण है कि भारी उद्योगों में बड़े आकार की एक-फेज़ मोटरें लगभग उपयोग में नहीं लाई जातीं। - बेहतर वोल्टेज रेगुलेशन और संतुलन
तीन-फेज़ प्रणाली में लोड सही तरीके से वितरित किया जाए तो वोल्टेज ड्रॉप कम होता है और सिस्टम अधिक स्थिर रहता है। संतुलित लोड की स्थिति में न्यूट्रल करंट लगभग शून्य हो जाता है, जिससे ओवरहीटिंग और फॉल्ट की संभावना कम होती है। - बड़े पावर रेटिंग वाले उपकरणों के लिए उपयुक्त
भारी मशीनें, कंप्रेसर, क्रेन, लिफ्ट, रोलिंग मिल और पंप जैसे उच्च शक्ति वाले उपकरण केवल तीन-फेज़ सप्लाई पर ही प्रभावी ढंग से चलाए जा सकते हैं। एक-फेज़ प्रणाली इनकी आवश्यकता पूरी नहीं कर सकती। - ट्रांसमिशन और वितरण प्रणाली अधिक विश्वसनीय
तीन-फेज़ प्रणाली में यदि किसी एक फेज़ में हल्का फॉल्ट भी आ जाए तो भी सिस्टम पूरी तरह बंद नहीं होता और आंशिक रूप से सप्लाई जारी रह सकती है। इससे सप्लाई की विश्वसनीयता बढ़ती है और औद्योगिक उत्पादन में रुकावट कम आती है। - आधुनिक विद्युत प्रणाली की आधारशिला
आज की लगभग पूरी पावर जनरेशन, ट्रांसमिशन और इंडस्ट्रियल सप्लाई तीन-फेज़ प्रणाली पर आधारित है। यह प्रणाली बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन और उपयोग के लिए सबसे व्यावहारिक, सुरक्षित और किफायती समाधान मानी जाती है।
थ्री फेज सिस्टम की सीमाएँ
- घरेलू उपयोग के लिए अनावश्यक जटिलता
सामान्य घरों में अधिकतर उपकरण कम शक्ति के होते हैं, जिन्हें एक-फेज़ सप्लाई से आसानी से चलला लिया जाता है। ऐसे में तीन-फेज़ प्रणाली लगाना तकनीकी रूप से संभव तो है, लेकिन व्यवहारिक रूप से अनावश्यक और महँगा साबित होता है। इसकी वायरिंग और प्रोटेक्शन व्यवस्था भी अधिक जटिल होती है। - असंतुलित लोड से समस्या उत्पन्न होना
यदि तीनों फेज़ पर लोड समान रूप से वितरित न हो, तो सिस्टम असंतुलित हो जाता है। इससे वोल्टेज असमान हो सकता है, न्यूट्रल करंट बढ़ सकता है और कुछ उपकरणों पर ओवरवोल्टेज या अंडरवोल्टेज की स्थिति पैदा हो सकती है। लंबे समय में यह उपकरणों को नुकसान पहुँचा सकता है। - फॉल्ट होने पर क्षति का दायरा बड़ा होना
तीन-फेज़ प्रणाली में वोल्टेज और शक्ति दोनों अधिक होते हैं। यदि शॉर्ट सर्किट, अर्थ फॉल्ट या किसी बड़े फेज़ फॉल्ट की स्थिति आ जाए, तो नुकसान भी गंभीर हो सकता है। उपकरणों के जलने, केबल के पिघलने और आग लगने का खतरा एक-फेज़ सिस्टम की तुलना में अधिक रहता है। - सुरक्षा व्यवस्था अधिक जटिल होना
तीन-फेज़ सिस्टम में ओवरकरंट रिले, फेज़ फेल्योर रिले, अंडर/ओवर वोल्टेज प्रोटेक्शन और अर्थिंग जैसी कई सुरक्षा व्यवस्थाएँ लगानी पड़ती हैं। यदि इनमें से कोई व्यवस्था ठीक से काम न करे, तो पूरा सिस्टम असुरक्षित हो सकता है। इसलिए डिजाइन और मेंटेनेंस में अधिक सावधानी जरूरी होती है। - स्थापना और रखरखाव की लागत अधिक होना
तीन-फेज़ प्रणाली में एक-फेज़ की तुलना में अधिक उपकरणों की आवश्यकता होती है, जैसे तीन-फेज़ ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर, सर्किट ब्रेकर और मीटर। इन सभी की कीमत अधिक होती है। इसके अलावा, इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के लिए कुशल तकनीशियन की जरूरत पड़ती है, जिससे प्रारंभिक लागत काफी बढ़ जाती है - कम लोड पर दक्षता घट जाना
जब तीन-फेज़ सिस्टम बहुत कम लोड पर चलाया जाता है, तो उसकी दक्षता घट जाती है। इस स्थिति में स्थायी हानियाँ (जैसे आयरन लॉस, मैग्नेटाइजिंग करंट) लगभग समान रहती हैं, जबकि उपयोगी शक्ति कम होती है। इससे ऊर्जा का अपव्यय बढ़ जाता है। - उपकरणों की उपलब्धता और मरम्मत में कठिनाई
तीन-फेज़ उपकरण हर छोटे बाजार या ग्रामीण क्षेत्र में आसानी से उपलब्ध नहीं होते। यदि कोई विशेष तीन-फेज़ मोटर या कंट्रोल डिवाइस खराब हो जाए, तो उसकी मरम्मत या रिप्लेसमेंट में समय और खर्च दोनों अधिक लग सकते हैं। - न्यूट्रल फेल होने पर गंभीर समस्या
चार-तार तीन-फेज़ प्रणाली में यदि न्यूट्रल कंडक्टर टूट जाए या ढीला हो जाए, तो एक-फेज़ लोड पर असामान्य वोल्टेज आ सकता है। इससे घरेलू उपकरण तुरंत खराब हो सकते हैं। यह समस्या विशेष रूप से असंतुलित लोड की स्थिति में बहुत खतरनाक हो जाती है। - प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता
तीन-फेज़ प्रणाली को समझने, चलाने और सुरक्षित रखने के लिए अच्छे तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता होती है। बिना प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा किया गया कनेक्शन या मरम्मत कार्य गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। - छोटे व्यवसायों के लिए लागत प्रभावी नहीं
जहाँ लोड बहुत कम होता है, जैसे छोटे दुकान, ऑफिस या घरेलू कार्य, वहाँ तीन-फेज़ सिस्टम लगाना आर्थिक रूप से उचित नहीं होता। एक-फेज़ प्रणाली वहाँ अधिक सरल, सस्ती और पर्याप्त होती है
थ्री फेज सिस्टम के अनुप्रयोग
- औद्योगिक मोटरों को चलाने में
तीन-फेज़ प्रणाली का सबसे बड़ा उपयोग औद्योगिक मोटरों को चलाने में होता है। फैक्ट्रियों में लगे पंप, कंप्रेसर, कन्वेयर बेल्ट, लिफ्ट, क्रेन और मशीन टूल्स लगभग सभी तीन-फेज़ सप्लाई पर ही चलते हैं। तीन-फेज़ मोटर स्वयं प्रारंभ होती है, उच्च टॉर्क देती है और लगातार लंबे समय तक बिना रुके काम कर सकती है, इसलिए भारी उद्योगों में इसका उपयोग अनिवार्य माना जाता है। - बिजली उत्पादन (जनरेशन) में
विद्युत जनरेटर तीन-फेज़ प्रणाली पर ही आधारित होते हैं। पावर प्लांट में टर्बाइन से जुड़े अल्टरनेटर तीन-फेज़ ए.सी. वोल्टेज उत्पन्न करते हैं, क्योंकि यह प्रणाली अधिक संतुलित होती है और बड़े पैमाने पर शक्ति उत्पादन के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। उत्पन्न की गई बिजली को आगे ट्रांसमिशन के लिए भी तीन-फेज़ रूप में ही भेजा जाता है। - लंबी दूरी के ट्रांसमिशन में
लंबी दूरी तक उच्च वोल्टेज पर बिजली भेजने के लिए तीन-फेज़ प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इसमें कम कंडक्टर में अधिक शक्ति भेजी जा सकती है और लाइन लॉस कम होता है। इसी कारण राष्ट्रीय ग्रिड और अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन लाइनें लगभग पूरी तरह तीन-फेज़ प्रणाली पर आधारित होती हैं। - विद्युत वितरण प्रणाली में
शहरों और कस्बों में बिजली वितरण के लिए चार-तार तीन-फेज़ प्रणाली का व्यापक उपयोग होता है। इससे एक ही लाइन से घरेलू एक-फेज़ उपभोक्ताओं और औद्योगिक तीन-फेज़ उपभोक्ताओं दोनों को सप्लाई दी जा सकती है। यह वितरण प्रणाली को लचीला और किफायती बनाती है। - बड़े ट्रांसफॉर्मरों और सब-स्टेशनों में
बिजली के वोल्टेज को बढ़ाने या घटाने के लिए लगाए गए बड़े ट्रांसफॉर्मर तीन-फेज़ होते हैं। सब-स्टेशन में पावर ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर और प्रोटेक्शन सिस्टम सभी तीन-फेज़ आधार पर डिजाइन किए जाते हैं, ताकि भारी शक्ति को सुरक्षित रूप से नियंत्रित किया जा सके। - रेलवे और मेट्रो सिस्टम में
इलेक्ट्रिक रेलवे, मेट्रो और ट्राम सिस्टम में ट्रैक्शन सप्लाई के लिए तीन-फेज़ प्रणाली का उपयोग किया जाता है। भारी भार खींचने वाली ट्रैक्शन मोटरों को उच्च टॉर्क और निरंतर शक्ति की आवश्यकता होती है, जो तीन-फेज़ प्रणाली से आसानी से प्राप्त होती है। - भारी विद्युत भट्टियों और हीटिंग सिस्टम में
स्टील प्लांट, फाउंड्री और कांच उद्योग में उपयोग होने वाली विद्युत भट्टियाँ (Electric Furnaces) तीन-फेज़ सप्लाई पर ही चलती हैं। इसमें उच्च शक्ति की आवश्यकता होती है और तीन-फेज़ प्रणाली से ताप समान रूप से वितरित होता है, जिससे प्रक्रिया अधिक नियंत्रित और कुशल बनती है। - बड़े पंपिंग और जल आपूर्ति सिस्टम में
नगर निगम के जल आपूर्ति पंप, सिंचाई परियोजनाओं के बड़े मोटर पंप और ड्रेनेज सिस्टम तीन-फेज़ सप्लाई पर चलते हैं। लंबे समय तक निरंतर संचालन और उच्च दक्षता के कारण यह प्रणाली जल प्रबंधन में अत्यंत उपयोगी है। - वाणिज्यिक भवनों और मॉल में
बड़े शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स, अस्पताल और ऊँची इमारतों में लिफ्ट, एस्केलेटर, एचवीएसी सिस्टम और जनरेटर सेट तीन-फेज़ सप्लाई पर आधारित होते हैं। इससे पूरे भवन को स्थिर और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति मिलती है। - वेल्डिंग और भारी मशीनरी में
आर्क वेल्डिंग मशीन, सीएनसी मशीन, प्रेस मशीन और रोलिंग मिल जैसे उपकरण तीन-फेज़ सप्लाई पर चलते हैं। इन उपकरणों को उच्च करंट और स्थिर वोल्टेज की आवश्यकता होती है, जो तीन-फेज़ प्रणाली से आसानी से प्राप्त होती है।
निष्कर्ष
थ्री फेज सिस्टम आधुनिक विद्युत प्रणाली की रीढ़ है। इसकी सहायता से अधिक शक्ति का उत्पादन, कुशल ट्रांसमिशन और स्मूद मोटर संचालन संभव होता है। उद्योग, पावर स्टेशन और भारी लोड के लिए थ्री फेज सिस्टम अनिवार्य है। प्रत्येक विद्युत अभियंता और छात्र के लिए इस प्रणाली का गहन अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।


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