“Quantum Computing kya hai?

क्वांटम कंप्यूटिंग क्या है?

क्वांटम कंप्यूटिंग एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जो क्वांटम मैकेनिक्स (Quantum Mechanics) के सिद्धांतों पर आधारित है। पारंपरिक कंप्यूटर (Classical Computer) जानकारी को बिट (Bit) के रूप में संग्रहित करते हैं, जहाँ प्रत्येक बिट का मान केवल 0 या 1 हो सकता है। लेकिन क्वांटम कंप्यूटर (Quantum Computer) जानकारी को क्यूबिट (Qubit) के रूप में संग्रहीत करते हैं, जो एक साथ 0 और 1 दोनों हो सकते हैं। यही गुण — जिसे सुपरपोजिशन (Superposition) कहा जाता है — क्वांटम कंप्यूटर को अत्यंत शक्तिशाली बनाता है। इसकी मदद से कुछ जटिल गणनाएँ (calculations) जो एक साधारण सुपरकंप्यूटर को सालों लग जाएँ, क्वांटम कंप्यूटर कुछ ही सेकंड में कर सकता है।

 क्वांटम कंप्यूटिंग की खोज किसने की? (History of Quantum Computing)

क्वांटम कंप्यूटिंग की जड़ें 20वीं सदी की शुरुआत में क्वांटम भौतिकी (Quantum Physics) की खोज से जुड़ी हैं।

1. प्रारंभिक विचार (1920 – 1970)

1920s – 1930s: क्वांटम सिद्धांत का विकास हुआ। वैज्ञानिक जैसे मैक्स प्लैंक (Max Planck), अल्बर्ट आइंस्टीन (Albert Einstein), नील्स बोहर (Niels Bohr), और एर्विन श्रोडिंगर (Erwin Schrödinger) ने क्वांटम भौतिकी की नींव रखी। 1960s: कंप्यूटिंग के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने सोचना शुरू किया कि क्या क्वांटम सिद्धांतों को गणना (computation) के लिए उपयोग किया जा सकता है।

2. क्वांटम कंप्यूटिंग की औपचारिक शुरुआत (1980s)

1981: प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी रिचर्ड फाइनमैन (Richard Feynman) ने पहली बार यह विचार प्रस्तुत किया कि एक क्वांटम प्रणाली को सटीक रूप से क्लासिकल कंप्यूटर से मॉडल करना बहुत कठिन है, इसलिए हमें ऐसे कंप्यूटर की आवश्यकता है जो स्वयं क्वांटम नियमों पर काम करे।

उन्होंने कहा – “Nature isn’t classical… and if you want to make a simulation of nature, you’d better make it quantum mechanical.”

इसके बाद, डेविड डॉइच (David Deutsch) — ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक वैज्ञानिक — ने 1985 में पहला क्वांटम एल्गोरिदम (Quantum Algorithm) प्रस्तावित किया और क्वांटम कंप्यूटर का सैद्धांतिक मॉडल विकसित किया।

3. महत्वपूर्ण माइलस्टोन (1990 – 2020)

1994: पीटर शॉर (Peter Shor) ने एक ऐसा क्वांटम एल्गोरिदम विकसित किया जो बड़ी संख्याओं के फैक्टराइजेशन (Factorization) को बहुत तेज़ी से कर सकता था। इससे यह सिद्ध हो गया कि क्वांटम कंप्यूटर क्रिप्टोग्राफी (Cryptography) जैसे क्षेत्रों में क्रांति ला सकते हैं।

1996: लव ग्रोवर (Lov Grover) ने एक एल्गोरिदम प्रस्तुत किया जो डेटाबेस सर्चिंग को तेज़ बना सकता है।

2000s: IBM, Google, Microsoft, D-Wave जैसी कंपनियों ने प्रयोगात्मक क्वांटम कंप्यूटर बनाना शुरू किया।

2019: Google ने घोषणा की कि उसके Sycamore Quantum Processor ने “Quantum Supremacy” हासिल कर ली है — यानी ऐसा काम किया जो किसी भी पारंपरिक सुपरकंप्यूटर के लिए असंभव था।

क्वांटम कंप्यूटर कैसे काम करता है? (How Quantum Computers Work)

क्वांटम कंप्यूटिंग की नींव क्वांटम मैकेनिक्स के तीन मुख्य सिद्धांतों पर आधारित है —

1. सुपरपोजिशन (Superposition)

क्लासिकल बिट या तो 0 होता है या 1, लेकिन क्यूबिट (Qubit) दोनों अवस्थाओं (states) में एक साथ रह सकता है। उदाहरण के लिए, अगर एक क्यूबिट 0 और 1 दोनों का प्रतिनिधित्व कर रहा है, तो एक साथ कई संभावनाएँ (possibilities) एक ही समय में गणना की जा सकती हैं।

2. एंटैंगलमेंट (Entanglement)

जब दो या अधिक क्यूबिट आपस में जुड़ जाते हैं, तो उनकी स्थिति एक-दूसरे पर निर्भर हो जाती है। अगर एक क्यूबिट की स्थिति बदलती है, तो दूसरे की भी स्वतः बदल जाएगी, चाहे वे कितनी भी दूर हों। यह गुण क्वांटम कंप्यूटिंग को तेज़ और सटीक गणना में मदद करता है।

3. इंटरफेरेंस (Quantum Interference)

क्वांटम इंटरफेरेंस से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सही उत्तरों की संभावनाएँ बढ़ें और गलत उत्तरों की संभावनाएँ कम हो जाएँ। यह प्रक्रिया क्वांटम एल्गोरिद्म को क्लासिकल एल्गोरिद्म से कई गुना तेज़ बनाती है।

क्यूबिट (Qubit) क्या होता है?

क्यूबिट क्वांटम कंप्यूटर की मूल इकाई (basic unit) है। यह जानकारी को क्वांटम अवस्था (quantum state) में संग्रहित करता है। क्यूबिट को भौतिक रूप में कई तरीकों से बनाया जा सकता है — सुपरकंडक्टिंग सर्किट (Superconducting Circuits) आयन ट्रैप (Ion Trap) फोटॉन (Photon) आधारित सिस्टम स्पिन-आधारित क्वांटम डॉट्स (Quantum Dots) हर तकनीक की अपनी विशेषताएँ और सीमाएँ हैं, लेकिन सभी का लक्ष्य स्थिर और त्रुटि-मुक्त क्यूबिट्स बनाना है।

क्लासिकल और क्वांटम कंप्यूटिंग में अंतर

विशेषताक्लासिकल कंप्यूटिंगक्वांटम कंप्यूटिंग
मूल इकाई     बिट (0 या 1)क्यूबिट (0 और 1 दोनों)
गणना की क्षमताक्रमवार (Sequential)समानांतर (Parallel)
गणना गतिसीमित  अत्यधिक तेज़
ऊर्जा खपतअधिक  तुलनात्मक रूप से कम
उपयोगसामान्य डेटा प्रोसेसिंगजटिल वैज्ञानिक गणना, एन्क्रिप्शन, AI
त्रुटि दर बहुत कमवर्तमान में अधिक, पर सुधार जारी है

क्वांटम एल्गोरिद्म (Quantum Algorithms)

क्वांटम कंप्यूटर को काम में लाने के लिए क्वांटम एल्गोरिद्म की आवश्यकता होती है। कुछ प्रसिद्ध एल्गोरिद्म हैं —

1. शॉर एल्गोरिद्म (Shor’s Algorithm): बड़ी संख्याओं को तेजी से फैक्टर करने के लिए।

2. ग्रोवर एल्गोरिद्म (Grover’s Algorithm): किसी डेटाबेस में जानकारी खोजने के लिए।

3. क्वांटम फुरियर ट्रांसफॉर्म (Quantum Fourier Transform): सिग्नल प्रोसेसिंग और डेटा विश्लेषण में उपयोगी।

4. क्वांटम मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म: डेटा पैटर्न को तेज़ी से सीखने के लिए।

क्वांटम कंप्यूटिंग के प्रकार

1. Analog Quantum Computer: यह सीमित प्रकार के क्वांटम सिस्टम्स पर केंद्रित होता है, जैसे D-Wave का सिस्टम।

2. Digital Quantum Computer: इसमें क्यूबिट्स पर लॉजिक गेट्स लागू किए जाते हैं, जो क्लासिकल कंप्यूटर की तरह काम करते हैं।

3. Hybrid Quantum Computer: इसमें क्लासिकल और क्वांटम दोनों प्रोसेसर साथ मिलकर कार्य करते हैं।

क्वांटम कंप्यूटिंग के उपयोग (Applications of Quantum Computing)

1. क्रिप्टोग्राफी (Cryptography)

क्वांटम कंप्यूटर मौजूदा एन्क्रिप्शन तकनीकों को तोड़ सकता है, लेकिन साथ ही यह क्वांटम क्रिप्टोग्राफी जैसी नई, अधिक सुरक्षित प्रणाली भी बना सकता है।

2. मेडिकल रिसर्च और ड्रग डिस्कवरी

क्वांटम कंप्यूटर जटिल रासायनिक संरचनाओं और अणुओं के व्यवहार को मॉडल कर सकते हैं, जिससे नई दवाओं की खोज में तेजी आती है।

3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence)

क्वांटम मशीन लर्निंग (Quantum ML) से डेटा पैटर्न को समझना और निर्णय लेना बहुत तेज़ हो जाता है।

4. वित्तीय क्षेत्र (Finance)

बड़ी-बड़ी वित्तीय कंपनियाँ जैसे Goldman Sachs, JP Morgan क्वांटम एल्गोरिद्म का प्रयोग जोखिम विश्लेषण, निवेश रणनीति और ट्रेडिंग में करने की कोशिश कर रही हैं।

5. ऑप्टिमाइजेशन (Optimization)

लॉजिस्टिक्स, ट्रैफिक मैनेजमेंट, या सप्लाई चेन जैसी समस्याओं में क्वांटम कंप्यूटिंग से सर्वोत्तम समाधान (best solution) तुरंत मिल सकता है।

6. मौसम पूर्वानुमान (Weather Prediction)

क्वांटम मॉडलिंग से पृथ्वी के जटिल जलवायु तंत्र को अधिक सटीक रूप से समझा जा सकता है।

प्रमुख कंपनियाँ और संस्थान जो क्वांटम कंप्यूटिंग पर काम कर रहे हैं

कंपनी / संस्थानयोगदान
IBMIBM Quantum Experience – क्लाउड आधारित क्वांटम कंप्यूटर प्लेटफॉर्म
GoogleSycamore Processor के जरिए Quantum Supremacy का दावा
MicrosoftAzure Quantum Platform के माध्यम से शोधकर्ताओं को एक्सेस
IntelSilicon-based Qubit विकास पर काम
D-Wave SystemsCommercial Quantum Annealer लॉन्च किया
Rigetti Computingक्लाउड क्वांटम सर्विस उपलब्ध करा रही है

भारत में क्वांटम कंप्यूटिंग की स्थिति

भारत में भी इस क्षेत्र में तेज़ी से प्रगति हो रही है।

2020 में, भारत सरकार ने “राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Mission on Quantum Technologies and Applications – NMQTA)” की घोषणा की। इसका लक्ष्य है कि अगले कुछ वर्षों में भारत अपने स्वयं के क्वांटम कंप्यूटर, क्वांटम सेंसर और क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क विकसित करे। IISc Bangalore, IIT Bombay, IIT Delhi, और TIFR जैसे संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण अनुसंधान कर रहे हैं।

 क्वांटम कंप्यूटिंग की चुनौतियाँ (Challenges)

1. क्यूबिट की स्थिरता (Decoherence):

क्यूबिट बहुत संवेदनशील होते हैं और बाहरी शोर या तापमान से उनकी स्थिति बदल जाती है।

2. त्रुटि सुधार (Error Correction):

क्वांटम कंप्यूटिंग में त्रुटियों को नियंत्रित करना अभी भी बड़ी चुनौती है।

3. हार्डवेयर की लागत:

सुपरकंडक्टिंग मशीनों को चलाने के लिए बहुत निम्न तापमान की आवश्यकता होती है, जो महंगा होता है।

4. कुशल प्रोग्रामर और वैज्ञानिकों की कमी:

इस क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों की संख्या बहुत कम है।

क्वांटम कंप्यूटिंग का भविष्य (Future of Quantum Computing)

भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग से लगभग हर उद्योग प्रभावित होगा। AI और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में गति और सटीकता बढ़ेगी। ड्रग डिस्कवरी और बायोटेक्नोलॉजी में शोध की गति कई गुना बढ़ जाएगी। साइबर सुरक्षा के लिए नए क्वांटम एन्क्रिप्शन सिस्टम तैयार होंगे। स्पेस एक्सप्लोरेशन, क्लाइमेट मॉडलिंग, और एनर्जी सेक्टर में भी इसका बड़ा योगदान होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 10–15 वर्षों में क्वांटम कंप्यूटर प्रयोगशाला से निकलकर व्यावसायिक रूप ले लेंगे और क्लासिकल कंप्यूटरों के साथ हाइब्रिड सिस्टम के रूप में काम करेंगे।

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