Introduction
Electro Discharge Machining (EDM) एक गैर-पारंपरिक (Non-traditional) या Unconventional Machining Process है, जिसमें धातु को ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy) के माध्यम से हटाया जाता है। इस प्रक्रिया में किसी प्रकार का भौतिक संपर्क टूल और वर्कपीस के बीच नहीं होता। EDM का उपयोग मुख्य रूप से अत्यधिक कठोर, भंगुर (Brittle) और उच्च गलनांक वाली धातुओं की मशीनिंग के लिए किया जाता है, जैसे टाइटेनियम, टंगस्टन, कार्बाइड्स, और इनकोनेल इत्यादि। EDM को कभी-कभी Spark Erosion Process, Electric Spark Machining, या Die-Sinking Process भी कहा जाता है। इसमें टूल और वर्कपीस के बीच अत्यधिक तीव्रता वाले छोटे-छोटे विद्युत स्पार्क (Electrical Sparks) उत्पन्न किए जाते हैं, जो वर्कपीस की सतह से धातु को पिघलाकर हटा देते हैं।
कार्य सिद्धांत (Working Principle)
EDM का कार्य सिद्धांत इस तथ्य पर आधारित है कि जब दो चालक पदार्थों (Conductors) के बीच एक छोटा गैप रखकर उच्च वोल्टेज की डीसी धारा प्रवाहित की जाती है, और उनके बीच डायलेक्ट्रिक द्रव (Dielectric Fluid) उपस्थित होता है, तो गैप में विद्युत स्पार्क उत्पन्न होता है। यह स्पार्क अत्यधिक तापमान (लगभग 8000°C से 12000°C तक) उत्पन्न करता है, जिससे वर्कपीस की सतह का एक छोटा सा भाग पिघल कर वाष्पित हो जाता है। इस प्रकार वर्कपीस से धीरे-धीरे सामग्री हटती जाती है। जब एक स्पार्क समाप्त होता है, तो डायलेक्ट्रिक द्रव पिघले हुए धातु के कणों को बहाकर बाहर निकाल देता है और गैप को पुनः तैयार करता है। यह प्रक्रिया बहुत तीव्र गति से बार-बार होती रहती है, जिससे वर्कपीस पर आवश्यक आकार या छेद बन जाता है। EDM में मटेरियल रिमूवल पूरी तरह से ऊष्मीय ऊर्जा पर आधारित होता है, न कि यांत्रिक बलों पर।
मुख्य घटक (Main Components of EDM Machine)
1. Power Supply (विद्युत आपूर्ति स्रोत)
EDM में पावर सप्लाई यूनिट डायरेक्ट करंट (DC) प्रदान करती है, जिसका वोल्टेज आमतौर पर 40 से 300 वोल्ट तक होता है। यह यूनिट टूल और वर्कपीस के बीच नियंत्रित रूप से पल्सिंग करंट भेजती है ताकि हर बार एक स्पार्क उत्पन्न हो सके। पावर सप्लाई में पल्स जनरेटर लगा होता है, जो करंट को बहुत छोटे अंतरालों (Microseconds) में ऑन और ऑफ करता है, जिससे स्पार्क का समय और तीव्रता नियंत्रित की जा सके। यह नियंत्रण मशीनिंग की सटीकता और सतह की गुणवत्ता पर सीधा प्रभाव डालता है।
2. Tool or Electrode (टूल या इलेक्ट्रोड)
EDM में टूल को इलेक्ट्रोड कहा जाता है, जो वर्कपीस के आकार के अनुरूप बनाया जाता है। टूल हमेशा चालक पदार्थ से बना होता है, जैसे कि कॉपर, ग्रेफाइट, टंगस्टन या ब्रास। टूल का आकार वही होता है जो वर्कपीस पर खोदना या काटना होता है। चूंकि टूल और वर्कपीस के बीच संपर्क नहीं होता, इसलिए टूल पर बहुत कम घिसाव होता है। इलेक्ट्रोड को वर्कपीस के बहुत करीब (0.01 से 0.5 मिमी गैप) रखा जाता है और यह लगातार वर्कपीस की ओर नियंत्रित रूप से फीड किया जाता है। टूल की डिजाइन इस प्रकार की जाती है कि डायलेक्ट्रिक द्रव वर्किंग एरिया से गुजर सके
3. Workpiece (वर्कपीस)
वर्कपीस EDM में एनोड या कैथोड के रूप में कार्य करता है (यह polarity पर निर्भर करता है)। सामान्यतः वर्कपीस को Positive polarity (Anode) और टूल को Negative polarity (Cathode) दी जाती है। वर्कपीस को मशीन टेबल पर मजबूती से क्लैम्प किया जाता है ताकि वह प्रक्रिया के दौरान स्थिर रहे। EDM प्रक्रिया के दौरान वर्कपीस की सतह पर छोटे-छोटे गड्ढे (Craters) बनते हैं, जो बाद में समग्र रूप में आवश्यक आकार प्रदान करते हैं।
4. Dielectric Fluid (डायलेक्ट्रिक द्रव)
डायलेक्ट्रिक द्रव EDM का एक आवश्यक घटक है। यह टूल और वर्कपीस के बीच की जगह को भरता है और स्पार्क उत्पन्न करने में सहायता करता है। सामान्यतः केरोसीन, ट्रांसफॉर्मर ऑयल या विशेष सिंथेटिक ऑयल को डायलेक्ट्रिक द्रव के रूप में उपयोग किया जाता है। इसका कार्य केवल इंसुलेटर का नहीं होता बल्कि यह पिघले हुए धातु के कणों (Debris) को बाहर निकालता है और गैप को ठंडा रखता है। हर स्पार्क के बाद यह द्रव गैप को साफ करता है ताकि अगला स्पार्क ठीक से उत्पन्न हो सके। यदि डायलेक्ट्रिक की सफाई ठीक न हो तो शॉर्ट सर्किट या असमान मशीनिंग हो सकती है।
5. Pump and Filter System (पंप व फ़िल्टर प्रणाली)
EDM में पंप सिस्टम डायलेक्ट्रिक द्रव को निरंतर प्रवाहित करता है ताकि गैप में ताज़ा द्रव पहुँचता रहे और मटेरियल कण बाहर निकल जाएँ। फ़िल्टर यूनिट डायलेक्ट्रिक द्रव में मौजूद पिघली हुई धातु के कणों और अशुद्धियों को हटा देती है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि स्पार्क समान रूप से बने रहें और सतह की गुणवत्ता प्रभावित न हो। यदि डायलेक्ट्रिक द्रव गंदा हो जाए तो स्पार्क का नियंत्रण कठिन हो जाता है।
6. Control Unit (नियंत्रण इकाई)
EDM मशीन में कंट्रोल यूनिट पूरी प्रक्रिया की निगरानी करती है। इसमें करंट, वोल्टेज, पल्स की अवधि, फीड रेट, और डायलेक्ट्रिक फ्लो को नियंत्रित करने की सुविधा होती है। आधुनिक EDM मशीनें CNC (Computer Numerical Control) सिस्टम से लैस होती हैं, जो जटिल आकारों की मशीनिंग को पूरी तरह स्वचालित रूप से करने में सक्षम होती हैं। नियंत्रण इकाई ही प्रक्रिया की सटीकता और दोहराव (Repeatability) सुनिश्चित करती है
कार्य प्रणाली (Working Process)
EDM की प्रक्रिया में सबसे पहले वर्कपीस को मशीन टेबल पर क्लैम्प किया जाता है और टूल को वर्कपीस के बहुत पास लाया जाता है। टूल और वर्कपीस के बीच डायलेक्ट्रिक द्रव प्रवाहित किया जाता है। पावर सप्लाई चालू करने पर गैप में उच्च वोल्टेज के कारण विद्युत क्षेत्र बनता है और जब यह क्षेत्र एक निश्चित सीमा से अधिक हो जाता है, तो डायलेक्ट्रिक द्रव आयनित होकर गैप में एक स्पार्क उत्पन्न करता है। यह स्पार्क बहुत ऊँचे तापमान का होता है और वर्कपीस की सतह का एक सूक्ष्म भाग पिघलाकर या वाष्पित कर देता है। जैसे ही स्पार्क समाप्त होता है, डायलेक्ट्रिक द्रव उस पिघले हुए धातु को ठंडा करके छोटे-छोटे कणों के रूप में बाहर निकाल देता है। यह प्रक्रिया प्रति सेकंड हजारों बार दोहराई जाती है, जिससे वर्कपीस पर वांछित आकार बनता जाता है।
Advantages of EDM
- अत्यधिक कठोर और जटिल धातुओं की मशीनिंग आसानी से की जा सकती है।
- टूल और वर्कपीस के बीच कोई भौतिक संपर्क नहीं होता, इसलिए टूल वियर बहुत कम होता है।
- उच्च सतह फिनिश और सटीकता प्राप्त होती है।
- बहुत छोटे छिद्र (Micro Holes) या जटिल प्रोफाइल बनाए जा सकते हैं।
- किसी भी चालक धातु पर यह प्रक्रिया लागू होती है।
- इसमें कोई कटिंग फोर्स नहीं लगती, जिससे वर्कपीस पर तनाव नहीं पड़ता।
Disadvantages of EDM
- यह केवल चालक (Conductive) पदार्थों पर ही कार्य कर सकती है।
- मटेरियल रिमूवल रेट अपेक्षाकृत धीमी होती है।
- डायलेक्ट्रिक द्रव ज्वलनशील होता है, जिससे सुरक्षा की आवश्यकता रहती है।
- टूल इलेक्ट्रोड का घिसाव समय के साथ बढ़ सकता है।
- प्रक्रिया में ऊष्मा के कारण वर्कपीस की सतह पर माइक्रो-क्रैक्स आ सकते हैं।
- प्रारंभिक लागत और बिजली की खपत अधिक होती है।
Applications of EDM
- .डाई और मोल्ड निर्माण – EDM का सबसे अधिक उपयोग प्लास्टिक इंजेक्शन मोल्ड और प्रेस टूल्स बनाने में होता है।
- एयरोस्पेस उद्योग – टर्बाइन ब्लेड और उच्च तापमान सहन करने वाले भागों की मशीनिंग में।
- ऑटोमोबाइल उद्योग – इंजन वाल्व, गियर, और सटीक प्रोफाइल पार्ट्स के निर्माण में।
- मेडिकल उपकरण निर्माण – सर्जिकल उपकरणों और इम्प्लांट्स की फाइन मशीनिंग में।
- माइक्रो-मशीनिंग – छोटे छेद, नोज़ल और माइक्रो-पार्ट्स के निर्माण में।
Electro Discharge Machining (EDM) एक ऐसी आधुनिक मशीनिंग तकनीक है जो ऊष्मीय ऊर्जा के सिद्धांत पर कार्य करती है। इसमें वर्कपीस और टूल के बीच उच्च वोल्टेज द्वारा उत्पन्न स्पार्क से धातु को पिघलाकर हटाया जाता है। यह प्रक्रिया उन धातुओं के लिए अत्यंत उपयोगी है जिनकी मशीनिंग पारंपरिक तरीकों से कठिन या असंभव होती है। EDM से अत्यंत सटीक, जटिल और सूक्ष्म आकार बनाए जा सकते हैं। हालांकि इसकी लागत और ऊर्जा खपत अधिक है, फिर भी इसकी सटीकता, सतह गुणवत्ता और जटिल आकृतियाँ बनाने की क्षमता इसे आधुनिक उद्योगों में अपरिहार्य बना देती है।
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