What is Single phase wiring

सिंगल फेज एवं थ्री फेज वायरिंग (Single Phase & Three Phase Wiring)

विद्युत प्रणाली में वायरिंग वह आधारभूत प्रक्रिया है जिसके माध्यम से विद्युत ऊर्जा स्रोत से उपभोक्ता उपकरणों तक सुरक्षित रूप से पहुँचाई जाती है। किसी भी भवन, उद्योग, फैक्ट्री, घर या कार्यालय में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता और सुरक्षा मुख्यतः वायरिंग प्रणाली पर निर्भर करती है।

सामान्यतः दो प्रकार की वायरिंग प्रणालियाँ उपयोग में लाई जाती हैं – सिंगल फेज वायरिंग और थ्री फेज वायरिंग। घरेलू उपयोग के लिए सिंगल फेज वायरिंग तथा भारी लोड और औद्योगिक उपयोग के लिए थ्री फेज वायरिंग अधिक उपयुक्त मानी जाती है।

इस लेख में हम सिंगल फेज एवं थ्री फेज वायरिंग के सिद्धांत, कनेक्शन विधियाँ, घटक, रंग कोड, सुरक्षा नियम, लाभ-हानियाँ, अनुप्रयोग तथा परीक्षा व साक्षात्कार से जुड़े प्रश्नों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

वायरिंग की परिभाषा

वायरिंग वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी भवन, मशीन, उपकरण या विद्युत प्रणाली में विद्युत ऊर्जा को सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया जाता है। इस प्रक्रिया में ताँबे या एल्युमिनियम के चालक तार, इंसुलेशन सामग्री, स्विच, सॉकेट, फ्यूज, एमसीबी तथा अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग किया जाता है ताकि विद्युत प्रवाह सही दिशा में हो और किसी भी प्रकार के शॉर्ट सर्किट, ओवरलोड या दुर्घटना से बचाव किया जा सके। सही प्रकार की वायरिंग न केवल उपकरणों के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक होती है, बल्कि यह मानव जीवन की सुरक्षा, ऊर्जा की बचत तथा पूरे विद्युत तंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सिंगल फेज वायरिंग (Single Phase Wiring)

सिंगल फेज वायरिंग विद्युत आपूर्ति की वह सरल प्रणाली है जिसका उपयोग सामान्यतः घरों, छोटे कार्यालयों और कम क्षमता वाले उपकरणों के लिए किया जाता है। इस प्रणाली में विद्युत आपूर्ति एक फेज तार और एक न्यूट्रल तार के माध्यम से की जाती है, जिनके बीच विभवांतर के कारण धारा प्रवाहित होती है। सिंगल फेज सप्लाई प्रायः 230 वोल्ट पर कार्य करती है और इसमें पंखा, बल्ब, टीवी, रेफ्रिजरेटर जैसे घरेलू उपकरण आसानी से संचालित किए जाते हैं। इसकी संरचना सरल होने के कारण इंस्टॉलेशन और रखरखाव आसान होता है, साथ ही लागत भी कम आती है। हालाँकि, अधिक शक्ति वाले मोटर या भारी मशीनों के लिए यह प्रणाली उपयुक्त नहीं मानी जाती, क्योंकि इसकी धारा वहन क्षमता सीमित होती है। सिंगल फेज वायरिंग छोटे स्तर की विद्युत आवश्यकताओं के लिए एक विश्वसनीय और सुरक्षित समाधान प्रदान करती

सिंगल फेज प्रणाली के तार (Wires in Single Phase)

सिंगल फेज विद्युत प्रणाली में उपयोग किए जाने वाले तारों का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इन्हीं तारों के माध्यम से विद्युत ऊर्जा स्रोत से उपभोक्ता तक पहुँचती है। सामान्यतः सिंगल फेज वायरिंग में तीन प्रकार के तार प्रयोग किए जाते हैं – फेज तार, न्यूट्रल तार और अर्थ तार। प्रत्येक तार का अपना अलग कार्य और पहचान होती है, जिससे पूरी प्रणाली सुरक्षित और संतुलित बनी रहती है।

Phase Wire(फेज तार) – फेज तार वह मुख्य चालक होता है जिसके द्वारा विद्युत आपूर्ति उपभोक्ता तक लाई जाती है। इसी तार में वोल्टेज उपस्थित होता है और इसी के माध्यम से धारा उपकरणों में प्रवाहित होती है। इसे आमतौर पर लाल, भूरा या काला रंग दिया जाता है ताकि इसकी पहचान आसानी से हो सके। किसी भी स्विच या सुरक्षा उपकरण को प्रायः इसी फेज तार में जोड़ा जाता है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर आपूर्ति को नियंत्रित या बंद किया जा सके।
Neutral Wire (न्यूट्रल तार) – न्यूट्रल तार विद्युत परिपथ को पूर्ण करने का कार्य करता है। यह धारा के वापस स्रोत की ओर लौटने का मार्ग प्रदान करता है, जिससे परिपथ संतुलित बना रहता है। न्यूट्रल तार का विभव लगभग शून्य के निकट होता है और इसे प्रायः नीले रंग से पहचाना जाता है। सही और मजबूत न्यूट्रल कनेक्शन के बिना उपकरण ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पाते और वोल्टेज असंतुलन की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
Earth Wire (अर्थ तार) – अर्थ तार सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत आवश्यक होता है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी उपकरण के धातु भाग में रिसाव धारा आने की स्थिति में उस धारा को सुरक्षित रूप से जमीन में प्रवाहित करना होता है, जिससे करंट लगने का खतरा कम हो जाता है। अर्थ तार सामान्यतः हरे या हरे-पीले रंग का होता है और इसे सीधे अर्थिंग इलेक्ट्रोड से जोड़ा जाता है। यह तार सामान्य संचालन में धारा नहीं वहन करता, बल्कि केवल आपात स्थिति में सुरक्षा प्रदान करता है।

सिंगल फेज विद्युत प्रणाली में विभिन्न तारों की पहचान के लिए मानक रंग कोड का प्रयोग किया जाता है, जिससे इंस्टॉलेशन, मरम्मत और सुरक्षा कार्य सरल और सुरक्षित बन सकें। सामान्यतः तीन प्रकार के तार होते हैं – फेज, न्यूट्रल और अर्थ, जिनके रंग निम्न प्रकार से निर्धारित किए जाते हैं।

फेज तार (Phase Wire) – इसका रंग सामान्यतः लाल (Red), भूरा (Brown) या कभी-कभी काला (Black) होता है। यही तार विद्युत आपूर्ति को स्रोत से उपकरण तक पहुँचाता है और इसमें मुख्य वोल्टेज उपस्थित होता है।
न्यूट्रल तार (Neutral Wire) – न्यूट्रल तार का मानक रंग प्रायः नीला (Blue) होता है। यह धारा को वापस स्रोत तक लौटाने का मार्ग प्रदान करता है और परिपथ को पूर्ण करता है।
अर्थ तार (Earth Wire) – अर्थ तार का रंग सामान्यतः हरा (Green) या हरा-पीला (Green with Yellow stripe) होता है। यह सुरक्षा तार होता है, जो रिसाव धारा को जमीन में प्रवाहित करके करंट लगने के खतरे से बचाता है।

सिंगल फेज वायरिंग का कनेक्शन

सिंगल फेज वायरिंग का कनेक्शन घरेलू और छोटे व्यावसायिक विद्युत तंत्र का आधार होता है। इसमें मुख्य रूप से फेज, न्यूट्रल और अर्थ – इन तीन तारों के माध्यम से परिपथ बनाया जाता है। विद्युत आपूर्ति पहले मुख्य लाइन से मीटर बोर्ड तक लाई जाती है, जहाँ से फेज तार को मुख्य स्विच, एमसीबी या फ्यूज के माध्यम से आगे भेजा जाता है। यह सुरक्षा उपकरण ओवरलोड या शॉर्ट सर्किट की स्थिति में सप्लाई को स्वतः बंद कर देते हैं, जिससे पूरे सिस्टम की सुरक्षा बनी रहती है।


फेज तार स्विच के माध्यम से विभिन्न लोड जैसे बल्ब, पंखा और सॉकेट तक पहुँचाया जाता है। स्विच हमेशा फेज तार में लगाया जाता है ताकि स्विच बंद करने पर उपकरण में कोई वोल्टेज न रहे। न्यूट्रल तार को मीटर से सीधे न्यूट्रल बस-बार तक ले जाकर सभी उपकरणों के न्यूट्रल टर्मिनल से जोड़ा जाता है। यही तार परिपथ को पूर्ण करता है और धारा को वापस स्रोत की ओर लौटाता है, इसलिए इसका कनेक्शन मजबूत और सही होना अत्यंत आवश्यक होता है।


अर्थ तार को अर्थिंग सिस्टम से जोड़कर सभी धातु आवरण वाले उपकरणों और वितरण बोर्ड से जोड़ा जाता है, जिससे रिसाव धारा सुरक्षित रूप से जमीन में चली जाए। तारों की मोटाई का चयन लोड के अनुसार किया जाता है ताकि तार गरम न हों और वोल्टेज ड्रॉप कम रहे। सही क्रम, मानक विधि और सावधानीपूर्वक किए गए कनेक्शन से सिंगल फेज वायरिंग लंबे समय तक सुरक्षित, विश्वसनीय और सुचारु रूप से कार्य करती रहती है।

सिंगल फेज वायरिंग के प्रकार

सिंगल फेज वायरिंग में विभिन्न परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग प्रकार की वायरिंग प्रणालियाँ अपनाई जाती हैं। इन प्रणालियों का चयन भवन की संरचना, सुरक्षा स्तर, लागत और सौंदर्य की आवश्यकता को ध्यान में रखकर किया जाता है। नीचे सिंगल फेज वायरिंग के प्रमुख प्रकारों का संक्षिप्त और स्पष्ट विवरण दिया गया है।

क्लीट वायरिंग (Cleat Wiring)
यह वायरिंग का सबसे सरल और अस्थायी प्रकार होता है, जिसमें तारों को दीवार या छत पर चीनी मिट्टी या प्लास्टिक के क्लीट की सहायता से खुले रूप में लगाया जाता है। इसका उपयोग प्रायः अस्थायी इंस्टॉलेशन, परीक्षण कार्य या मरम्मत के समय किया जाता है। यह प्रणाली सस्ती होती है, परन्तु देखने में अच्छी नहीं लगती और बाहरी प्रभावों से सुरक्षा कम मिलती है।
केसिंग-कैपिंग वायरिंग (Casing-Capping Wiring)
इस प्रणाली में तारों को लकड़ी या पीवीसी की बनी केसिंग में रखा जाता है और ऊपर से कैपिंग लगाकर ढक दिया जाता है। इससे तार सुरक्षित रहते हैं और दीवार पर साफ-सुथरा रूप दिखाई देता है। यह वायरिंग मध्यम लागत की होती है और छोटे घरों तथा कार्यालयों में काफी प्रचलित रही है।
कंड्यूट वायरिंग (Conduit Wiring)
कंड्यूट वायरिंग सबसे सुरक्षित और आधुनिक प्रणाली मानी जाती है। इसमें तारों को पीवीसी या धातु के पाइप (कंड्यूट) के भीतर डाला जाता है, जो या तो दीवार के ऊपर लगाए जाते हैं या दीवार के अंदर छिपा दिए जाते हैं। यह प्रणाली आग, नमी और यांत्रिक क्षति से बेहतर सुरक्षा प्रदान करती है, इसलिए आजकल आवासीय और व्यावसायिक भवनों में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है।
बैटन वायरिंग (Batten Wiring)
इस प्रकार की वायरिंग में तारों को लकड़ी की पट्टी पर क्लिप की सहायता से किया जाता है। यह प्रणाली हल्के लोड के लिए उपयुक्त होती है और कम लागत में जल्दी इंस्टॉल की जा सकती है। हालाँकि, इसकी सुरक्षा और आयु कंड्यूट वायरिंग की तुलना में कम होती है।
लीड शीथ वायरिंग (Lead Sheath Wiring)
इस प्रणाली में तारों के ऊपर सीसा (लीड) की परत चढ़ी होती है, जिससे नमी और रासायनिक प्रभावों से सुरक्षा मिलती है। इसका उपयोग पहले अधिक होता था, परन्तु आजकल इसके भारी वजन और उच्च लागत के कारण इसका प्रयोग बहुत कम हो गया है।

सिंगल फेज वायरिंग के लाभ

  • सरल संरचना और आसान समझ – सिंगल फेज वायरिंग की बनावट सरल होती है, जिसमें केवल फेज, न्यूट्रल और अर्थ तार का प्रयोग किया जाता है। इसकी कार्यप्रणाली को समझना आसान होता है, इसलिए नए तकनीशियन और घरेलू उपयोगकर्ता भी इसे जल्दी सीख सकते हैं। सरल संरचना के कारण गलती की संभावना कम रहती है।
  • कम लागत में इंस्टॉलेशन -इस प्रणाली में तारों की संख्या कम होती है और वितरण बोर्ड भी साधारण होता है, जिससे इंस्टॉलेशन की कुल लागत कम आती है। छोटे घरों, दुकानों और कार्यालयों के लिए यह आर्थिक दृष्टि से उपयुक्त विकल्प माना जाता है।
  • घरेलू उपकरणों के लिए उपयुक्त – पंखा, बल्ब, टीवी, फ्रिज, मिक्सर जैसे सामान्य घरेलू उपकरण सिंगल फेज सप्लाई पर आसानी से कार्य करते हैं। कम और मध्यम शक्ति वाले लोड के लिए यह प्रणाली पूरी तरह पर्याप्त होती है।
  • रखरखाव और मरम्मत में सुविधा – सिंगल फेज वायरिंग में परिपथ सरल होने के कारण खराबी का पता लगाना और मरम्मत करना आसान होता है। कम जटिलता के कारण समय और श्रम दोनों की बचत होती है।
  • कम जगह की आवश्यकता – इस प्रणाली में केबल, स्विचगियर और वितरण पैनल आकार में छोटे होते हैं। इसलिए छोटे कमरों, फ्लैटों और सीमित स्थान वाले भवनों में इसे आसानी से लगाया जा सकता है।
  • ऊर्जा की स्थिर और नियंत्रित आपूर्ति – हल्के लोड पर सिंगल फेज सप्लाई अपेक्षाकृत स्थिर वोल्टेज प्रदान करती है। इससे उपकरण सुरक्षित रूप से चलते हैं और वोल्टेज में अधिक उतार-चढ़ाव नहीं होता।
  • सुरक्षा उपकरणों का सरल उपयोग – एमसीबी, फ्यूज और ईएलसीबी जैसे सुरक्षा उपकरण सिंगल फेज सिस्टम में आसानी से लगाए जा सकते हैं। ये उपकरण शॉर्ट सर्किट, ओवरलोड और अर्थ फॉल्ट की स्थिति में तुरंत सप्लाई बंद कर देते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा कम हो जाता है।
  • छोटे स्तर के व्यवसायों के लिए उपयुक्त – छोटी दुकानों, क्लीनिक, टेलर शॉप और ऑफिस जैसे स्थानों पर भारी मशीनों की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे स्थानों के लिए सिंगल फेज वायरिंग पर्याप्त और किफायती समाधान प्रदान करती है।
  • कम प्रशिक्षण में संचालन संभव – इस प्रणाली के संचालन के लिए बहुत अधिक तकनीकी प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती। सामान्य जानकारी रखने वाला व्यक्ति भी इसके मूल संचालन और सुरक्षा नियमों को समझ सकता है।
  • व्यापक उपलब्धता और मानकीकरण – सिंगल फेज सप्लाई लगभग हर क्षेत्र में आसानी से उपलब्ध होती है और इसके उपकरण मानक आकार और विनिर्देशों में मिल जाते हैं। इससे रिप्लेसमेंट और विस्तार का कार्य सरल हो जाता है।

सिंगल फेज वायरिंग की सीमाएँ

  • सीमित शक्ति वहन क्षमता – सिंगल फेज वायरिंग कम और मध्यम स्तर के लोड के लिए उपयुक्त होती है। भारी मोटर, बड़ी मशीनें या उच्च क्षमता वाले उपकरण इस प्रणाली पर सही ढंग से नहीं चल पाते, क्योंकि इसकी धारा वहन क्षमता सीमित होती है।
  • भारी लोड पर वोल्टेज ड्रॉप की समस्या – अधिक लोड जुड़ने पर वोल्टेज में गिरावट आ सकती है, जिससे उपकरणों की कार्यक्षमता घट जाती है। लंबे केबल या कमजोर तार होने पर यह समस्या और अधिक बढ़ जाती है।
  • उच्च शक्ति वाले मोटरों के लिए अनुपयुक्त – सिंगल फेज सप्लाई पर मोटरों का स्टार्टिंग टॉर्क कम होता है। इसलिए बड़े पंप, कंप्रेसर और औद्योगिक मोटर इस प्रणाली पर सुचारु रूप से प्रारंभ नहीं हो पाते।
  • ऊर्जा वितरण में असंतुलन – एक ही फेज पर सभी लोड जुड़े होने के कारण असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यदि एक साथ कई उपकरण चलें तो सप्लाई पर अधिक दबाव पड़ता है और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या हो सकती है।
  • भविष्य में विस्तार की सीमित संभावना – यदि बाद में अधिक क्षमता वाले उपकरण जोड़ने हों तो सिंगल फेज सिस्टम पर्याप्त नहीं रहता। ऐसे में पूरी वायरिंग बदलकर थ्री फेज सिस्टम अपनाना पड़ सकता है, जिससे अतिरिक्त खर्च होता है।
  • लाइन लॉस अपेक्षाकृत अधिक – समान शक्ति पर सिंगल फेज में धारा अधिक होती है, जिससे लाइन में ऊर्जा हानि बढ़ जाती है। इससे सिस्टम की समग्र दक्षता कम हो जाती है।
  • औद्योगिक उपयोग के लिए अनुपयुक्त – फैक्ट्रियों, वर्कशॉप और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जहाँ भारी मशीनें चलती हैं, वहाँ सिंगल फेज वायरिंग व्यवहारिक नहीं मानी जाती।
  • स्टार्टिंग में झटके की संभावना – कुछ उपकरणों, विशेषकर मोटर आधारित उपकरणों में, स्टार्टिंग के समय झटका या अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है, जो उपकरण की आयु को प्रभावित कर सकती है।
  • अधिक धारा के कारण तार गरम होने का खतरा – भारी लोड पर तारों में अधिक धारा बहती है, जिससे तार गरम हो सकते हैं और इंसुलेशन खराब होने का जोखिम बढ़ जाता है।
  • सीमित वोल्टेज स्थिरता – सप्लाई में थोड़े-बहुत उतार-चढ़ाव का प्रभाव सीधे उपकरणों पर पड़ता है, क्योंकि संतुलन के लिए अन्य फेज उपलब्ध नहीं होते।

निष्कर्ष (Conclusion)

अंततः यह कहा जा सकता है कि सिंगल फेज वायरिंग घरेलू और छोटे व्यावसायिक विद्युत उपयोग के लिए एक सरल, किफायती और विश्वसनीय प्रणाली है। इसकी संरचना आसान होने के कारण इंस्टॉलेशन, संचालन और रखरखाव में अधिक कठिनाई नहीं आती। फेज, न्यूट्रल और अर्थ तारों के सही संयोजन से यह प्रणाली उपकरणों को सुरक्षित विद्युत आपूर्ति प्रदान करती है और सामान्य दैनिक आवश्यकताओं को सहज रूप से पूरा करती है। हालाँकि, इसकी सीमित शक्ति क्षमता के कारण इसे भारी मशीनों और औद्योगिक उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इसलिए, सही लोड आकलन, मानक विधि और सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए यदि सिंगल फेज वायरिंग की जाए, तो यह लंबे समय तक सुरक्षित, टिकाऊ और प्रभावी समाधान सिद्ध होती है।

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